अमित पांडेय, खैरागढ़। नगर पालिका खैरागढ़ में 35 लाख रुपए की लागत से खरीदी गई फायर ब्रिगेड वाहन पिछले कई वर्षों से लापता है। हैरानी की बात यह है कि वाहन का ठिकाना तो दूर, उससे जुड़ी खरीद फाइल भी पहले गायब हो चुकी है। इस मामले में नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, अविभाजित राजनांदगांव जिले के दौरान गौण खनिज मद से नगर पालिका को दो किश्तों में लगभग 35 लाख रुपये जारी किए गए थे। पहली किश्त में 13 लाख 13 हजार रुपये से वाहन का चेसिस खरीदा गया, जबकि दूसरी किश्त में 21 लाख रुपये से अधिक खर्च कर वाहन को पूर्ण रूप से तैयार कराया गया। अक्टूबर 2020 में यह वाहन नगर पालिका को सौंपा गया था। कुछ महीनों तक सेवा देने के बाद वाहन अमलीडीह के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद उसे मरम्मत के लिए भेजा गया। इसके बाद से यह वाहन आज तक शहर वापस नहीं लौटा।


मामले में नगर पालिका ने वर्ष 2023 में उपभोक्ता फोरम में बीमा कंपनी के खिलाफ दावा दायर किया था, जिसके बाद करीब 8 लाख रुपये का सेटलमेंट भी किया गया। इसके बावजूद वाहन को वापस लाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। बताया जा रहा है कि जिस गैरेज में वाहन खड़ा है, उसका किराया लगभग 7 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।
इस पूरे मामले पर खैरागढ़ एडीएम सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने बताया कि मामले में सीएमओ खैरागढ़ से जानकारी लेकर जवाब-तलब किया जाएगा। फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सुविधा का वर्षों तक उपयोग से बाहर रहना और जिम्मेदारों के पास स्पष्ट जवाब नहीं होना, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि जनता की सुरक्षा के लिए खरीदा गया यह वाहन आखिर कहां है और अब तक इसकी वापसी के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और वर्षों से गायब इस वाहन की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
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