राखीगढ़ी /हांसी। हरियाणा के राखीगढ़ी में जारी उत्खनन के दौरान अहम पुरातात्विक खोज सामने आई है। यहां से सोने का एक अनोखा लाकेट, बड़ी संख्या में सोने के मनके और चर्ट पत्थर से बने बाट मिले हैं, जो प्राचीन आभूषण निर्माण और विकसित व्यापारिक व्यवस्था के संकेत देते हैं।
पहली बार मिला खास तरह का सोने का लाकेट
खुदाई में मिला लाकेट बेहद खास माना जा रहा है। इसे कीमती पत्थर पर सोने की परत चढ़ाकर तैयार किया गया है। टीला नंबर 2 और 5 से मिले मनकों और इस लाकेट से संकेत मिलता है कि उस समय सोने का उपयोग व्यापक स्तर पर किया जाता था और आभूषण निर्माण की तकनीक उन्नत थी।
व्यापार और तोल प्रणाली के साक्ष्य
उत्खनन में रोहरी चर्ट से बने बाट भी मिले हैं, जो आज के पाकिस्तान क्षेत्र में पाए जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय दूर-दराज के इलाकों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित थे।
इन बाटों से यह भी संकेत मिलता है कि वस्तुओं के लेन-देन के लिए मानकीकृत तोल प्रणाली प्रचलन में थी। हालांकि, अभी तक तराजू के अवशेष नहीं मिले हैं।
विशेषज्ञों की क्या राय?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षक पुरातत्वविद मनोज सक्सेना के अनुसार, उत्खनन में सोने का लाकेट और करीब 12 मनके मिले हैं। साथ ही सोना तोलने के लिए चर्ट के बाट भी प्राप्त हुए हैं।
इनकी गुणवत्ता जांच के लिए नमूनों को प्रयोगशाला भेजा जाएगा और कुछ नमूनों को विदेश में परीक्षण के लिए भेजने की तैयारी है।
हड़प्पा सभ्यता की झलक
हड़प्पा सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक मानी जाती है, जो सिंधु घाटी क्षेत्र में विकसित हुई थी।
इसे तीन चरणों में बांटा जाता है:
प्रारंभिक (3300–2600 ईसा पूर्व)
परिपक्व (2600–1900 ईसा पूर्व)
उत्तर (1900–1300 ईसा पूर्व)
परिपक्व काल में नगर योजना और जल निकासी प्रणाली का उच्च स्तर देखने को मिलता है।
अन्य सभ्यताओं से तुलना
हालांकि हड़प्पा सभ्यता में सोने का उपयोग आभूषणों तक सीमित था, लेकिन मिस्र और मेसोपोटामिया जैसी सभ्यताओं में इससे पहले और अधिक मात्रा में सोने का उपयोग होता था, जो राजसत्ता और धार्मिक संरचनाओं से जुड़ा था।

