मुंगेर। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मंगलवार का दिन आध्यात्मिक दर्शन, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा और संगठनात्मक बैठकों के नाम रहा। खगड़िया और मुंगेर के दौरों से लेकर भागलपुर के क्षतिग्रस्त पुल के निरीक्षण तक, मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास और राजनीति दोनों मोर्चों पर अपनी सक्रियता दिखाई।

मां कात्यायनी और तिरुपति बालाजी के चरणों में CM

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने दौरे की शुरुआत खगड़िया स्थित प्रसिद्ध मां कात्यायनी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की। इसके पश्चात, वे मुंगेर पहुंचे जहां उन्होंने ज्योति मंदिर में आंध्र प्रदेश से लाई गई भगवान तिरुपति बालाजी की भव्य मूर्ति के दर्शन किए। इस दौरान उनके साथ डिप्टी सीएम विजय चौधरी भी मौजूद रहे। मुंगेर के पोलो मैदान में इस उपलक्ष्य में एक भव्य लेजर लाइट और 550 ड्रोन वाला शो भी आयोजित किया गया, जो आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।

​विक्रमशिला सेतु का हवाई सर्वे और सेना से मदद की अपील

​भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर हाल ही में हुई दुर्घटना ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। 3 मई की रात पुल का करीब 34 मीटर लंबा स्लैब गिर गया था। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को इस सेतु का हवाई सर्वे करने का निर्णय लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, उन्होंने केंद्र सरकार से संपर्क कर पुल की तत्काल मरम्मत के लिए भारतीय सेना की तकनीकी मदद भी मांगी है।

​विकास की समीक्षा: मुंगेर-भागलपुर मरीन ड्राइव

​बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने मुंगेर के बबुआ घाट पर प्रस्तावित गंगा पथ (मरीन ड्राइव) परियोजना का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रजेंटेशन के माध्यम से कार्य की प्रगति और भविष्य की रूपरेखा पेश की। यह परियोजना मुंगेर और भागलपुर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

​विदेशी मेहमान का स्वागत और गयाजी का दौरा

​इससे पहले, मुख्यमंत्री गया पहुंचे जहां उन्होंने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति तो लाम ने विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री की इस मौजूदगी ने बिहार के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।

​संगठन मंत्र: विश्व की सबसे बड़ी पार्टी जैसा हो आचरण

​एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा में एक बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बन सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि:

  • ​पार्टी की गरिमा के अनुरूप अपना आचरण और व्यवहार रखें।
  • ​संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत बनाने के लिए समर्पित रहें।
  • ​अनुशासन और जिम्मेदारी को ही अपनी प्राथमिकता बनाएं।