​भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के स्लैब ध्वस्त होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच उपजा संकट गहराता जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा की गई वैकल्पिक नाव व्यवस्था अब आम जनमानस, विशेषकर मजदूर वर्ग के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। मंगलवार की शाम बरारी गंगा घाट पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब प्रशासन ने शाम 5 बजे के बाद नाव परिचालन पर रोक लगा दी। घर लौटने की आस में खड़े सैकड़ों लोगों ने प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ जमकर हंगामा किया।

​समय सीमा बनी मुसीबत: 5 बजते ही रुक गए चप्पू

​प्रशासनिक गाइडलाइन के अनुसार, नावों का परिचालन सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक ही निर्धारित किया गया है। मंगलवार शाम जैसे ही घड़ी की सुइयां 5 पर पहुंचीं, नाविकों ने परिचालन बंद कर दिया। इस दौरान घाट पर मजदूर, छात्र, दूध और केला व्यापारियों की भारी भीड़ जमा थी। दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद अपने घर नवगछिया लौटने का इंतजार कर रहे मजदूरों का सब्र जवाब दे गया। लोगों का कहना था कि काम खत्म कर लौटते-लौटते शाम हो जाती है, ऐसे में 5 बजे की पाबंदी उनके लिए घर पहुंचने के सारे रास्ते बंद कर देती है।

​पुलिस और जनता के बीच तीखी नोकझोंक

​हंगामे की सूचना मिलते ही ट्रेनी डीएसपी प्रेरणा सिंह और इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। आक्रोशित लोग बार-बार दौड़कर नावों पर सवार होने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिस बल द्वारा जबरन उतारा गया। प्रशासन का स्पष्ट तर्क था कि सुरक्षा कारणों और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के कारण सूर्यास्त के बाद नाव चलाना संभव नहीं है। वहीं, दूसरी ओर लोग अपनी मजबूरी का हवाला देते हुए पुलिस से उलझते नजर आए।

​मजदूरी करें या घर जाएं? – मजदूरों का छलका दर्द

​घाट पर फंसे मजदूरों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, हम रोज कमाने-खाने वाले लोग हैं। अगर शाम 5 बजे तक ही नाव चलेगी, तो हम मजदूरी कब करेंगे और बच्चों के लिए राशन कब ले जाएंगे? कम से कम 6 या 7 बजे तक नावों का परिचालन होना चाहिए। व्यापारियों ने भी चिंता जाहिर की कि यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो उनका व्यापार पूरी तरह चौपट हो जाएगा।

​वैकल्पिक व्यवस्था की मांग

​विक्रमशिला सेतु पर आवागमन ठप होने से पैदा हुई इस स्थिति ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों की मांग है कि जब तक सेतु की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक नावों के फेरे बढ़ाए जाएं और परिचालन के समय में ढील दी जाए ताकि देर शाम काम से लौटने वाले कामगार अपने परिवार के पास सुरक्षित पहुंच सकें। फिलहाल, घाट पर सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन लोगों का आक्रोश अभी भी शांत नहीं हुआ है।