भागलपुर। नगर निगम में इन दिनों माहौल काफी तनावपूर्ण है। अपनी जायज मांगों और हक के लिए नगर निगम के स्थायी सफाईकर्मियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 20 अप्रैल से चल रहा धरना अब 4 मई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में बदल चुका है, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

​प्रमुख मांगें और प्रशासन की बेरुखी

​नगर सफाई कर्मचारी संघ के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य मांग सातवें वेतनमान का लाभ और पिछले दो वर्षों से काटी गई राशि का भुगतान करना है। संघ के अध्यक्ष लड्डू हरि के अनुसार, कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सचिव शंकराचार्य उपाध्याय ने बताया कि 24 जून से बिना किसी स्पष्ट कारण के सातवें वेतनमान का भुगतान रोक दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।

​भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: “कर्ज लेकर दी रिश्वत”

​इस आंदोलन के बीच भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संघ के सचिव नागेश्वर हरि ने आरोप लगाया कि नगर निगम के एक ‘बड़ा बाबू’ ने फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर रिश्वत की मांग की। एक कर्मचारी को ₹5000 का कर्ज लेकर रिश्वत देनी पड़ी, इसके बावजूद दो साल बीत जाने के बाद भी फाइल वहीं की वहीं अटकी है। यह खुलासा निगम के भीतर व्याप्त बाबूशाही और भ्रष्टाचार की पोल खोलता है।

​सरकारी प्रक्रिया की कछुआ चाल

​कर्मचारियों की परेशानी का एक बड़ा कारण फाइलों का सत्यापन न होना भी है। बताया गया कि कर्मचारियों के दस्तावेजों का विवरण 28 अगस्त 2025 को सरकार के पास भेजा गया था। लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस सुस्ती के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने बकाया भुगतान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

​आर-पार की लड़ाई का ऐलान

​आर्थिक और मानसिक शोषण से तंग आकर कर्मचारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं करती और बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित नहीं होता, तब तक उनकी भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।