महाराष्ट्र में एक बार फिर हिंदी बनाम मराठी भाषा का विवाद सामने आया है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए होने वाली हिंदी भाषा परीक्षा को फिलहाल कैंसिल कर दिया है। यह परीक्षा 28 जून को होने वाली थी, जिसे अब अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया गया है। यह फैसला राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के विरोध के बाद लिया गया।
महाराष्ट्र सरकार ने मनसे के कड़े विरोध के बाद सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित हिंदी भाषा परीक्षा को स्थगित कर दिया है।
महाराष्ट्र में भाषा को लेकर छिड़ा सियासी घमासान अब मंत्रालय की दहलीज तक पहुंच गया है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कड़े विरोध और ‘अल्टीमेटम’ के बाद राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित हिंदी भाषा की परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
महाराष्ट्र सरकार के भाषा निदेशालय ने राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों के लिए 28 जून को मुंबई, पुणे और नागपुर सहित चार केंद्रों पर हिंदी परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की थी। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इसे ‘मराठी अस्मिता’ पर चोट बताते हुए चेतावनी दी थी कि यदि परीक्षा रद नहीं की गई, तो परीक्षा केंद्रों पर जो ‘तमाशा’ होगा, उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
मनसे का कहना था कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा को सबसे अधिक महत्व मिलना चाहिए और सरकारी कर्मचारियों पर हिंदी भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए। पार्टी ने चेतावनी भी दी थी कि अगर परीक्षा हुई तो विरोध प्रदर्शन होंगे और राज्य में जो भी स्थिति बनेगी उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अभी परीक्षा पर रोक लगाने का फैसला किया। मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि फिलहाल इस परीक्षा को स्थगित किया जा रहा है।
इस फैसले को जहां मनसे अपनी जीत बता रही है, वहीं हिंदीभाषी समाज इसे भाषाई राजनीति के नए अध्याय के रूप में देख रहा है। बता दें कि महाराष्ट्र नागरिक सेवा (हिंदी भाषा परीक्षा) नियम, 1976 के अनुसार राज्य सरकार के हर राजपत्रित और अराजपत्रित कर्मचारी के लिए हिंदी का ज्ञान होना अनिवार्य था।
बता दे कि जिन कर्मचारियों ने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान दसवीं में हिंदी विषय नहीं पढ़ा था, उन्हें सरकारी सेवा में आने के बाद एक निश्चित समय सीमा के भीतर हिंदी भाषा परीक्षा पास करनी पड़ती थी। परीक्षा पास न करने पर वेतन वृद्धि रोकने या पदोन्नति में बाधा जैसे प्रविधान थे।
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