Kota Hospital News: राजस्थान के शिक्षा नगरी कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले 48 घंटे किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं रहे। यहां सिजेरियन ऑपरेशन कराने आईं 6 महिलाओं में से 2 की मौत हो गई है, जबकि 4 अन्य जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। अस्पताल के गलियारों में चीख-पुकार मची है और परिजनों का सीधा आरोप है कि एक गलत इंजेक्शन ने उनकी हंसती-खेलती दुनिया उजाड़ दी।

इंजेक्शन लगाया और शरीर नीला पड़ गया
अस्पताल के बाहर रोते-बिलखते परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। परिजनों ने बताया कि सोमवार रात और मंगलवार के बीच ऑपरेशन तो ठीक हुए, लेकिन जैसे ही महिलाओं को पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया, खेल बिगड़ गया। मृतक ज्योति और पायल के घरवालों का आरोप है कि स्टाफ ने एक ऐसा इंजेक्शन लगाया जिसके बाद मरीजों की प्लेटलेट्स गिरने लगीं और किडनी में इन्फेक्शन फैल गया। ज्योति के परिजनों ने तो यहां तक कह दिया कि, डॉक्टरों ने पुरानी फाइलें गायब कर दी हैं ताकि असल दवा का नाम सामने न आए।
मुंडन, धरना और मुआवजे की मांग
मामला बढ़ता देख राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर परिजन अस्पताल के गेट पर ही धरने पर बैठ गए हैं। विरोध इतना तीखा था कि कांग्रेस नेता चेतन सोलंकी ने अस्पताल परिसर में ही अपना मुंडन करवा लिया। प्रदर्शनकारियों की साफ मांग है दोषी डॉक्टरों और स्टाफ पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो। पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा मिले। लापरवाही की हाई-लेवल जांच हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कलेक्टर और जयपुर की टीम ने संभाला मोर्चा
हड़कंप मचने के बाद कोटा कलेक्टर पीयूष सामरिया खुद वार्डों का दौरा करने पहुंचे। जयपुर के एसएमएस अस्पताल से विशेषज्ञों की एक स्पेशल टीम देर रात कोटा पहुंची और दवाओं के सैंपल्स लिए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों का हाल जाना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। फिलहाल, 2 महिलाओं की हालत इतनी गंभीर है कि उन्हें जयपुर शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है, जिससे परिजन और ज्यादा डरे हुए हैं।
क्या कहती है अस्पताल की सफाई?
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन का कहना है कि यह मेडिकल कॉम्प्लिकेशन हो सकता है। महिलाओं में यूरिन आउटपुट बंद होना और ब्लड प्रेशर गिरने जैसे लक्षण मिले हैं। हालांकि, उन्होंने फाइल गायब होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अब पूरी जांच एफएसएल (FSL) रिपोर्ट और डेथ ऑडिट कमेटी पर टिकी है, जो बताएगी कि आखिर इन मौतों के पीछे सिस्टम की सुई थी या कुछ और।
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