राजेश वर्मा, नारायणगढ(अम्बाला)। सीएचसी शाहजादपुर के एसएमओं डॉ. गुरप्रीत सिंह ने कहा कि टीबी रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के कारण ही इस रोग से बचा जा सकता है। उन्होने कहा कि जिला अम्बाला में सिविल सर्जन डॉ. रेणु बेरी के नेतृत्व में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर निक्षय शिविर आयोजित किये जा रहे है।

इन शिविरों का उदे्श्य टीबी (क्षय रोग) की शीघ्र पहचान, नि:शुल्क जांच एवं पूर्ण उपचार सुनिश्चित करना है। उन्होने ब्लॉक शहजादपुर के सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इन निक्षय शिविरों में बढ़-चढक़र भाग लें और यदि किसी में टीबी के लक्षण हों तो तुरंत जांच करवाएं। उन्होंने बताया इस बीमारी को लेकर लोगों में अभी भी कई शंकाएं हैं। लेकिन उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि पूरा उपचार लेने उपरांत इस बीमारी से पूर्ण रूप से निजात पाई जा सकती है।

टीबी के प्रमुख लक्षण एवं संकेत-2 सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम में खून आना, बुखार (विशेषकर शाम/रात को), रात में पसीना आना, वजन कम होना एवं भूख में कमी, कमजोरी एवं थकान सामान्य लक्षण है। जांच (Sputum E&amination)-बलगम की जांच CBNAAT/Truenat , छाती का एक्स-रे, CBNAAT/Truenat टेस्ट (त्वरित एवं सटीक जांच)।उपचार (Treatment)-टीबी का उपचार पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध है।

मरीजों को राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत DOTSस्/निक्षय योजना के तहत नियमित दवाएं दी जाती हैं। उपचार की अवधि सामान्यत: 6 महीने या चिकित्सक द्वारा निर्धारित अनुसार होती है। उपचार के दौरान पोषण सहायता (निक्षय पोषण योजना) भी ले रहे हैं, उनसे विशेष अनुरोध है कि वे पूरा उपचार कोर्स अवश्य पूरा करें। बीच में दवा छोडऩे से रोग दोबारा उभर सकता है और MDR (Multi Drug Resistant) तथा XDR (E&tensively Drug Resistant) टीबी का खतरा बढ़ जाता है, जिसका इलाज अधिक कठिन और लंबा होता है।

एसएमओं ने कहा कि टीबी एक पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, यदि समय पर जांच और पूरा इलाज किया जाए। किसी भी प्रकार के लक्षण होने पर निकटतम निक्षय शिविर या स्वास्थ्य केंद्र में तुरंत संपर्क करें। समाज में जागरूकता फैलाएं और टीबी रोगियों के प्रति भेदभाव न करें। उन्होने सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में भागीदार बनें।