पटना: राजधानी के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में नर्सिंग की छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा है। लगातार दूसरे दिन भी छात्राओं ने संस्थान के मुख्य द्वार को घेर रखा है, जिससे अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज का माहौल शिक्षा के बजाय मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का केंद्र बन गया है।
अस्पताल की घेराबंदी, एम्बुलेंस और डॉक्टरों का रास्ता बंद
छात्राओं के प्रदर्शन के कारण IGIMS का मुख्य गेट पूरी तरह जाम है। स्थिति इतनी गंभीर है कि न तो एम्बुलेंस अस्पताल के अंदर जा पा रही हैं और न ही डॉक्टर ड्यूटी पर पहुंच पा रहे हैं। गंभीर मरीजों को इलाज मिलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्राएं अपनी मांगों पर अडिग हैं।
प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन कर रही लगभग 450 छात्राओं (सत्र 2021-2025) का सीधा निशाना कॉलेज की प्रिंसिपल अनुजा डैनियल और वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता हैं। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि:
- मारपीट और गाली-गलौज: वाइस प्रिंसिपल पर छात्राओं के साथ शारीरिक हिंसा और अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप है।
- रिजल्ट में धांधली: छात्राओं का कहना है कि उन्हें जानबूझकर परीक्षाओं में फेल किया जाता है ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके।
- मानसिक उत्पीड़न: छोटी-छोटी बातों पर अपमानित करना और हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है।
”कोठा नहीं कॉलेज है” के पोस्टरों से जताया विरोध
छात्राओं के हाथों में मौजूद पोस्टरों पर लिखे नारे संस्थान की साख पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। “ये कॉलेज है, कोठा नहीं” और “मानसिक प्रताड़ना बंद करो” जैसे नारों के साथ छात्राएं दोनों अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग कर रही हैं।
आत्महत्या की कोशिश और प्रशासन की चुप्पी
हैरान करने वाली बात यह है कि छात्राओं ने दावा किया कि इस प्रताड़ना से तंग आकर कुछ लड़कियों ने आत्महत्या की कोशिश की है, जबकि पूर्व में कुछ छात्राएं अपनी जान दे भी चुकी हैं। छात्राओं का कहना है कि 10 महीने पहले भी शिकायत की गई थी और 6 सदस्यीय जांच कमेटी बनी थी, लेकिन आज तक उस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया।
छात्राओं ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को हटाया नहीं जाता, तब तक कक्षाओं का बहिष्कार और मुख्य द्वार पर धरना जारी रहेगा।
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