हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के नामी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 100 से ज्यादा बेड वाले कई बड़े अस्पताल बिना फायर सेफ्टी अनुमति के ही चल रहे हैं। इस गंभीर मामले पर हाईकोर्ट इंदौर में सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए शासन और अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

ओडिशा के अस्पताल में आग लगने से 11 लोगों की मौत

याचिकाकर्ता चर्चित शास्त्री की ओर से अधिवक्ता अदित रघुवंशी ने कोर्ट में खुलासा किया कि इंदौर के कई बड़े अस्पताल—मयूर, इंदौर सिटी, लक्ष्मी मेमोरियल, सेवाकुंज, शुभदीप, आर एन कपूर, प्रमिला, एसएनएस और मेडिस्टा, बिना फायर सेफ्टी अनुमति के संचालित हो रहे हैं। यानी जिन जगहों पर लोगों की जान बचाई जाती है, वहीं खुद सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं। कोर्ट में यह भी बताया गया कि उड़ीसा के कटक में हाल ही में एक अस्पताल में आग लगने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद इंदौर में भी जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

9 अस्पताल में फायर सेफ्टी की अनुमति ही नहीं

जानकारी के मुताबिक, कलेक्टर ने जांच की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी माधव हासानी को दी थी, लेकिन आरोप है कि इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वहीं नगर निगम की फायर सेफ्टी शाखा से आरटीआई में मिली जानकारी ने और चौंकाया है। कम से कम 9 अस्पताल ऐसे मिले, जिनके पास फायर सेफ्टी की अनुमति ही नहीं थी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना फायर सेफ्टी के ये अस्पताल चल कैसे रहे हैं? और उससे भी बड़ा सवाल- ऐसे अस्पतालों को रजिस्ट्रेशन किस आधार पर दिया गया?

इलाज के नाम पर लोगों की जान जोखिम में

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ- न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और न्यायाधीश आलोक अवस्थी- ने साफ कहा कि “यह जनता की जान से जुड़ा मामला है” और शासन को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई पर शासन और अस्पताल संचालकों को जवाब देना होगा। फिलहाल, इस खुलासे के बाद इंदौर के हेल्थ सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है-क्या शहर के अस्पताल इलाज के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं?

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