जालंधर। पंजाब के जालंधर में बीएसएफ हेडक्वार्टर के पास हुए आईईडी (IED) धमाके में बाल-बाल बचे स्कूटी मालिक गुरप्रीत उर्फ कृष (20) की जान ना बचती अगर उसके पापा का फोन उस दिन नहीं आता। अच्छी बात यह है कि गुरप्रीत को पुलिस ने बेगुनाह पाए जाने पर पूछताछ के बाद छोड़ दिया है।
हिरासत से बाहर आए गुरप्रीत ने बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि वह आज भी सदमे में है। गुरप्रीत ने बताया कि बुधवार रात करीब 8 बजे वह फ्लिपकार्ट का एक रिटर्न पार्सल लेने के लिए बीएसएफ कैंपस के पास स्कूटी खड़ी कर मेल चेक कर रहा था। उसी समय घर से पापा का फोन आ गया और वह बात करने के लिए स्कूटी से करीब 100 मीटर दूर गया, तभी जोरदार धमाका हुआ। युवक के मुताबिक, “अगर पापा का फोन न आता तो शायद मैं जिंदा न होता”।
एक कान से नहीं दे रहा सुनाई
गुरप्रीत ने बताया कि धमाके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उसे अभी भी एक कान से कुछ सुनाई नहीं दे रहा और एक टांग नहीं चल रही है। धमाके के गर्म टुकड़े उसकी पीठ पर भी लगे, जिससे वह घायल हो गया। वह कहता है कि इस धमाके को कभी भी भुला नहीं जा सकता। शरीर के साथ साथ इस हादसे ने मानसिक रूप से कई तकलीफ दी है। मन में हमेशा के लिए एक बुरी याद बैठ गई है, जो पता नहीं कब दूर होगी। गुरप्रीत ने कहा कि धमाके के बाद वह बुरी तरह डर गया था और जान बचाने के लिए बीएसएफ कैंपस की तरफ भागा, जहाँ जवानों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया और पूछताछ की.

परिवार की स्थिति है खराब
युवक के पिता बीएसएफ से रिटायर हैं और घर पर कर्ज है। उसकी मां दिल की मरीज हैं और घर में वही अकेला कमाने वाला है। जालंधर पुलिस कमिश्नर ने युवक से लंबी पूछताछ की। उसकी मोबाइल लोकेशन, फ्लिपकार्ट ऐप हिस्ट्री और सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद उसे बेगुनाह पाया गया और छोड़ दिया गया। युवक ने पुलिस के व्यवहार की प्रशंसा की और कहा कि उसके साथ बच्चे की तरह व्यवहार किया गया।
गौरतलब है कि इस धमाके की जांच अब नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) कर रही है।धमाके में अपनी स्कूटी गंवा चुके गुरप्रीत ने सरकार से मांग की है कि उसकी खराब हुई सामाजिक छवि को सुधारा जाए, स्कूटी का मुआवजा दिया जाए और उसे सरकारी नौकरी दी जाए ताकि वह अपने बीमार माता-पिता का सहारा बन सके।
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