कुंदन कुमार/ पटना। तेजस्वी यादव ने प्रदेश की नई कैबिनेट और एनडीए सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार के गठन से लेकर परिवारवाद और विकास के मुद्दों पर भाजपा-नीतीश गठबंधन को घेरा।
6 महीने की बर्बादी और ‘सिलेक्टेड’ नेतृत्व
तेजस्वी ने कहा कि पिछले छह महीनों में बिहार ने दो मुख्यमंत्री देखे और आधा समय सिर्फ सरकार बनाने-बिगाड़ने में बीत गया। उन्होंने सम्राट चौधरी को “सिलेक्टेड सीएम” बताते हुए कहा कि भाजपा के पास कोई विजन नहीं है। तेजस्वी के अनुसार, किसी भी मंत्री को विभाग समझने का समय ही नहीं मिल रहा, जिससे विकास पूरी तरह ठप है।
परिवारवाद पर भाजपा को घेरा
भाजपा के ‘परिवारवाद’ वाले एजेंडे पर पलटवार करते हुए तेजस्वी ने कहा, “अब भाजपा को इस पर बोलने का नैतिक हक नहीं है।” उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट में 17 मंत्री परिवारवादी पृष्ठभूमि से हैं और तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘निशिकांत’ और ‘दीपक प्रकाश’ के संदर्भ में कहा कि कुछ “शहजादे” बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बन गए हैं, जबकि हम जनता का मैंडेट लेकर आते हैं। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बच्चे भी राजनीति में दिखेंगे।
सामाजिक असंतुलन और क्षेत्रीय अनदेखी
तेजस्वी ने कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय असंतुलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि दूसरे समुदायों और विशेषकर मुसलमानों को उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला? उन्होंने कहा, “लालू जी के समय 7-8 मुस्लिम मंत्री होते थे, आज क्या स्थिति है?” उन्होंने विजय सिन्हा की वरीयता घटाने और एक ही प्रखंड से दो-दो मंत्री बनाने पर भी तंज कसा।
विफल वादे और बेरोजगारी
TRE 4 के छात्रों पर लाठीचार्ज और बढ़ती बेरोजगारी का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने पूछा कि महिलाओं को ₹1,90,000 देने और फ्री बिजली के वादों का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि बिहार सबसे गरीब राज्य बना हुआ है और सरकार सिर्फ ‘रीलबाजी’, एनकाउंटर और विपक्षियों पर केस करने में व्यस्त है।
विपक्षी एकजुटता का मंत्र
इंडिया ब्लॉक पर तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि भाजपा को रोकने के लिए क्षेत्रीय दलों को सबसे पहले एक साथ बैठना होगा। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता बिहार को नंबर 1 राज्य बनाना है, न कि सत्ता का बंदरबांट करना।
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