शिखिल ब्यौहार, भोपाल। राज्यसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस में मंथन का दौर चरम पर है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस बार राज्यसभा में एंट्री से इंकार कर दिया है। दिल्ली में आलाकमान से प्रदेश के नेताओं से लंबा मंथन हुआ। लिहाजा वर्तमान हालातों के मद्देनजर अब दिग्गज कमलनाथ को राज्यसभा में भेजने की तैयारी भी लगभग पूरी कर ली गई है।
सूत्रों की माने तो कमलनाथ के नाम को लेकर दिग्गजों ने आपत्ति भी नहीं जताई। कारण राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग, हॉर्स ट्रेडिंग जैसे शब्दों का बड़ा भय..बड़ा डर..। दरअसल, कांग्रेस के यदि चार विधायक ने पाला बदला तो समीकरण भी बदल जाएंगे। दतिया सीट से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद 230 सदस्यीय सदन में कांग्रेस विधायकों की संख्या अब 64 है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगा रखी है। बीना विधायक निर्मला सप्रे के दल बदल का मामला लंबित होने होने से कांग्रेस के 62 वोट हो गए हैं। उधर, एमपी से राज्यसभा के सफर के लिए 58 वोटों की अनिवार्यता है। मतलब कांग्रेस के लिए यह मामला फिलहाल पेंचिदा है। ऐसे में कमलनाथ से नाम पर मोहर लगाकर इस खतरे को कुछ हद तक कम करने का काम संगठन कर रहा है। प्रत्याशी बतौर अन्य नामों पर जो अंतर्कलह सामने आ सकती है उसे नाथ के नाम के साथ विराम देने की कोशिश की जा रही है। दूसरे भी कई पहलू कमलनाथ के नाम को प्रबल बना रहे हैं। इसमें ऐज फैक्टर, आपसी सहमति, प्रदेश संगठन में कमलनाथ को प्रबल करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव भी हैं।
इसके अलावा कमलनाथ का लंबा राजनीतिक अनुभव भी है। राष्ट्रीय पदाधिकारी से लेकर अलग-अलग विभागों के केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ताजपोशी हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो यह भी है कि राज्यसभा में दो सीट पक्की कर चुकी बीजेपी यदि तीसरी सीट पर जोर आजमाइश करे तो ऐसा नाम जरूरी है जो संकट से उबार सकें या संकट पैदा न होने दे। इसमें दोमत नहीं की राज्य सभी प्रत्याशी बतौर जब तक दिल्ली जब तक अधिकृत घोषणा नहीं कर देती तब तक दिग्विजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन, अरुण यादव, जीतू पटवारी समेत अन्य नामों से इंकार नहीं किया जा सकता। मामले पर कांग्रेस ने कहा कि प्रत्याशी कौन होगा..यह तो दिल्ली से ही तय होगा। लेकिन इसमें भी दोमत नहीं कि कमलनाथ प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेस नेता है। दूसरी ओर बीजेपी ने आरोप लगाया कि पहले दिग्विजय को उनके ही शब्दों से कांग्रेस हाईकमान ने राज्यसभा जाने से इंकार करा साइड लाइन किया। अब कांग्रेस कमलनाथ को राज्यसभा भेजकर प्रदेश की सियासत से दूर करेगी। यह कुछ और नहीं बल्कि कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी की शतरंजी चाल है।

