Dharm Desk :- राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम धाम देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां महाभारत के वीर बर्बरीक को भगवान श्रीकृष्ण के दिए नाम ‘श्याम’ से पूजा जाता है। खाटू श्याम मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित कथा उनके शीश के अवतरण की है।लोककथा के अनुसार बर्बरीक का शीश जमीन के भीतर से प्रकट हुआ था और इसके पीछे एक गाय से जुड़ी चमत्कारिक घटना बताई जाती है।
गाय के दूध से हुआ शीश का दिव्य प्रकट होना
खाटू गांव में एक गाय रोज एक निश्चित जगह पर जाकर अपने आप दूध गिरा देती थी। काफी समय तक यह सिलसिला चलता रहा। जब गांव वालों ने इस घटना को बार-बार देखा तो उन्हें उस जगह के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। इसके बाद उस जगह की खुदाई की गई। खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से एक शीश मिला गांव वालों ने इसकी जानकारी तत्कालीन शासक राजा रूप सिंह चौहान को दी। लोककथा के अनुसार उसी रात राजा को सपने में संकेत मिला कि जमीन से मिला शीश महाभारत के वीर बर्बरीक का है। उन्हें वहां पूजा कराने और मंदिर बनवाने का निर्देश मिला। इसके बाद वहां मंदिर का निर्माण कराया गया और यही स्थान आगे चलकर खाटू श्याम धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

बर्बरीक क्यों कहलाए शीश के दानी
बर्बरीक को महाभारत के महान योद्धा घटोत्कच का पुत्र बताया गया है।लोककथाओं के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद बर्बरीक का शीश खाटू क्षेत्र में अवतरित हुआ।जहां बाद में मंदिर का निर्माण कराया गया।उनके पास तीन शक्तिशाली बाण थे।जिसके कारण उन्हें ‘तीन बाणधारी’ कहा जाता हैं। युद्ध में उन्होंने हमेशा कमजोर पक्ष का साथ देने का संकल्प लिया था। कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश दान में मांगा और उन्होंने बिना संकोच अपना शीश अर्पित कर दिया।
श्रीकृष्ण ने दिया था वरदान
बर्बरीक की भक्ति और त्याग से खुश होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनकी पूजा उनके नाम ‘श्याम’ से होगी। बर्बरीक के इसी स्वरूप को खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है और देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

