हेमंत शर्मा, इंदौर। मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर शहर में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर 103 साल पुरानी ऐतिहासिक झांकियों की परंपरा एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। आज शाम 6 बजे डीआरपी लाइन चौराहे से 22 भव्य झांकियों का कारवां निकलेगा। धार्मिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित इन झांकियों को देखने के लिए शहरवासियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए दोपहर 3 बजे से शहर में डायवर्टेड ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया गया है।

खजराना गणेश मंदिर की झांकी रहेगी सबसे आगे

परंपरा के अनुसार, झांकियों का जुलूस पिछले साल की तरह तय क्रम में ही निकलेगा। सबसे आगे खजराना गणेश मंदिर की झांकी होगी, जिसके बाद शास्त्री कॉर्नर, इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA), नगर निगम और शहर की विभिन्न मिलों की भव्य झांकियां शामिल होंगी। मिल परिसरों में दिन-रात झांकियों को अंतिम रूप दिया गया, जिनमें आकर्षक सजावट, रोशनी और रंग-रोगन का काम पूरा कर लिया गया है।

झांकियों और अखाड़ों के लिए निर्णायक समितियां गठित

कलेक्टर शिवम वर्मा के आदेश पर चल समारोह के दौरान निकलने वाली झांकियों और अखाड़ों के मूल्यांकन के लिए पृथक निर्णायक समितियों का गठन किया गया है। झांकी निर्णायक समिति (5 सदस्य): इस समिति में प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम, महासचिव प्रदीप जोशी, परियोजना अधिकारी राजेंद्र मंडलोई, PWD कार्यपालन यंत्री चेतना चौहान और ITI प्रशिक्षण अधिकारी विपिन पुरोहित को शामिल किया गया है।

अखाड़ा निर्णायक समिति (12 सदस्य)

अखाड़ों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए रविंद्रसिंह गौड़, बुद्धासिंह पहलवान, रमेश यादव, सुरेश राणे पहलवान, मानसिंह यादव, विनोद गांधी, गोपाल बैरासी, दिनेश शुक्ला ‘गुरु’, राजा (पिता रतन पहलवान यादव), मीत भवानी कश्यप, गोपाल यादव और गोविंद गुर्जर को जिम्मेदारी दी गई है। दोनों समितियों के संयोजक उप संचालक जनसंपर्क पुष्पेंद्र वास्कले बनाए गए हैं। समितियां निर्धारित मापदंडों के आधार पर उत्कृष्ट झांकियों और अखाड़ों का चयन करेंगी।

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