शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक तथा नकल जैसी आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जहाँ परीक्षा में गड़बड़ी और नकल माफियाओं के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ का गठन किया गया है।
प्रदेश में कहां-कहां बनेंगी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट?
मामलों की त्वरित सुनवाई और सुगमता के लिए सरकार ने प्रदेश को चार न्यायिक जोन में बांटते हुए इन विशेष अदालतों का गठन किया है:
भोपाल कोर्ट: इसके दायरे में भोपाल, सीहोर, रायसेन, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, राजगढ़ और विदिशा जिले आएंगे।
इंदौर कोर्ट: इसमें इंदौर, धार, रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, उज्जैन, देवास सहित पूरा मालवा-निमाड़ बेल्ट शामिल रहेगा।
ग्वालियर कोर्ट: इसके अंतर्गत ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर और टीकमगढ़ जिले आएंगे।
जबलपुर कोर्ट: इसमें जबलपुर, सागर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा, शहडोल और महाकौशल-बुंदेलखंड के बाकी जिले शामिल होंगे।
3 महीने में ट्रायल पूरा करने का सख्त टारगेट
राज्य सरकार ने इन मामलों में अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए एक सख्त समय-सीमा तय की है। त्वरित ट्रायल: सरकार का लक्ष्य है कि अदालत में चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर लिया जाए। विशेष अभियोजक: इसके लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की जाएगी, जिनका मुख्य फोकस साक्ष्यों की प्रभावी प्रस्तुति और गवाहों का समय पर प्रबंधन करना होगा।
हर जिले में SIT का गठन
इसके साथ ही राज्य के प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाएगा, जो पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों की त्वरित और निष्पक्ष जांच करेगी। सरकार के इस कड़े और अभूतपूर्व कदम से नकल माफियाओं और साफ्टवेयर से छेड़छाड़ कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है।

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