शिखिल ब्यौहार, भोपाल। दीपावली के पापन पर्व से ठीक पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महंगाई का बड़ा तड़का लगा है। त्योहारी सीजन के ऐन मौके पर खाद्यान्न, सब्जियों और सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) की कीमतों में आई भारी तेजी ने आम जनता की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अल्प वर्षा (कम बारिश) के चलते मंडियों में फसलों की आवक घटने से दाल-चावल, आटा-मैदा, शक्कर और ड्राई फ्रूट्स के दाम आसमान छू रहे हैं। हालांकि, इसके बावजूद बाजारों में त्यौहार की रौनक और खरीदारी का उत्साह बना हुआ है।
आटा, मैदा और सूजी के दामों में उछाल
थोक बाजार में अनाज की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। क्विंटल पर बढ़े दाम: आटा 250 रुपये, मैदा 200 रुपये और सूजी 300 रुपये प्रति क्विंटल तक महंगी हो गई है। मिठाई-नमकीन पर असर: आटा, मैदा और सूजी की कीमतों में वृद्धि होने से त्योहारी सीजन में बनने वाली मिठाइयों और नमकीन की निर्माण लागत भी बढ़ गई है, जिससे बाजारों में इनके दाम भी प्रभावित हो रहे हैं।
दाल और चावल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी
रसोई के मुख्य आहार दाल और चावल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में जोरदार उछाल देखा गया है। दालें हुई महंगी: तुअर (अरहर) दाल 8 से 12 रुपये, हरी मूंग 8 से 10 रुपये और चना दाल 6 से 8 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो चुकी है। चावल के दाम चढ़े: दुबराज चावल में 8 से 10 रुपये और बासमती चावल में 12 से 14 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। शक्कर ₹60 प्रति किलो हुई पर ₹10 प्रति किलो दाम में इजाफा हुआ है। बीते दिनों ₹70 प्रति किलो तक शक्कर पहुंची थी। 22 सितंबर को ₹70 प्रति किलो तक पहुंच शक्कर गई थी।
ड्राई फ्रूट्स 30% तक महंगे, प्याज 50 रुपये किलो
त्यौहारी उपहारों और पकवानों में इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवों के दाम भी आम आदमी की पहुंच से दूर होते दिख रहे हैं। ड्राई फ्रूट्स पर मार: काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश जैसी सामग्रियों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। प्याज के तेवर तल्ख: थोक मंडी में प्याज की कीमत 50 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई है। प्याज के कड़वे आंसुओं का असर आम घरों के बजट के साथ-साथ होटल और कैटरिंग कारोबार पर भी साफ नजर आ रहा है।
व्यापारी बोले— मांग और आपूर्ति में अंतर, अभी और बढ़ सकते हैं दाम
महंगाई की इस स्थिति पर भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने बताया कि इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण फसलों की आवक में भारी कमी आई है, जिससे मांग और आपूर्ति (Demand-Supply Gap) के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों के दाम अभी और बढ़ सकते हैं। व्यापारी संगठनों ने शासन-प्रशासन से बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

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