महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने विधानसभा में कहा कि ‘गिग’ और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ के हितों के लिए महायुति सरकार जल्द ही एक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गठित करने का प्रावधान है। इसका क्रियान्वयन 21 नवंबर 2025 से शुरू किया है। इस संहिता में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। इस कानून के तहत राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया जाएगा।
कौन है यह वर्कर
गिग वर्कर्स उन श्रमिकों को कहा जाता है, जिनका काम अस्थायी होता है। ‘प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ वे होते हैं जो डिजिटल या ऑनलाइन मंच के जरिए काम करते हैं। स्विगी, जोमेटो, ओला, उबर जैसी कई कंपनियों में गिग वर्कर्स को पार्टनर के रूप में संबोधित किया जाता है। पिछले दिनों मुंबई में 10 हजार डिलीवरी बॉय के रूप में काम करने वाले वर्कर्स ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 31 दिसंबर 2025 को हड़ताल की थी।
किसने पूछा था सवाल?
शनिवार को विधानसभा में विधायक अतुल भातखलकर , हेमंत ओगले सहित अन्य सदस्यों ने राज्य के गिग वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन, बीमा और सामाजिक सुरक्षा लागू संबंधित मामलों को लेकर सवाल पूछा। सदन में उन्होंने कहा कि गिग और ‘प्लेटफॉर्म’ वर्कर्स को पहले कभी “कर्मचारी” का दर्जा नहीं मिला। उन्हें डिलीवरी के हिसाब से भुगतान पाने वाले कारोबारी साझेदार माना जाता है। नवंबर 2025 से लागू सामाजिक सुरक्षा संहिता ने पहली बार ‘गिग’ और ‘प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ की स्थिति को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है।
मंत्री फुंडकर ने क्या बताया?
इस पर मंत्री फुंडकर ने सदन को बताया कि जब राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना हो जाएगी तब राजस्थान व कर्नाटक में बनाए गए राज्य-विशिष्ट कानून स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे। फुंडकर ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गिग वर्कर्स को स्वास्थ्य सेवा, बीमा और परिवार कल्याण लाभ प्रदान करेगा। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को इस संहिता के प्रावधानों का पालन करने और उन्हें लागू करने का निर्देश दिया है।
सभी सुविधाएं प्रदान की जाएगी
श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने सदन में कहा कि राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के माध्यम से कामगारों को जीवन और दिव्यांग बीमा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा, शिक्षा सहायक सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। राज्य स्तर पर भी असंगठित कामगारों के लिए अलग बोर्ड गठित करने का प्रावधान किया गया है। इससे आने वाले समय में राज्य के गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा।
राजस्थान और कर्नाटक के कानून हो जाएंगे खत्म
फुंडकर ने एक महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के अस्तित्व में आते ही राज्यों के अपने कानून लैप्स (समाप्त) हो जाएंगे। फिलहाल राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों ने गिग वर्कर्स के कल्याण के लिए अपने स्तर पर कानून बनाए हैं। केंद्र के निर्देशानुसार, अब सभी राज्यों को केंद्रीय सोशल सिक्योरिटी कोड के प्रावधानों का ही पालन करना होगा।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


