दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में चार बड़े सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को मिलाकर AIIMS की तर्ज पर एक मल्टी-स्पेशियलिटी संस्थान बनाने का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। इस योजना के तहत पूर्वी दिल्ली के चार प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों को एकीकृत करने की तैयारी है।
चार बड़े अस्पताल होंगे एकीकृत
प्रस्तावित योजना में गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (IHBAS संस्थानों को शामिल किया जाएगा इन संस्थानों को एक साथ लाने का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञताओं और उपचार सुविधाओं को एकीकृत व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराना है। इससे मरीजों को अलग-अलग बीमारियों के इलाज के लिए बेहतर समन्वित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञ इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर रहेगा जोर
प्रस्तावित मल्टी-स्पेशियलिटी संस्थान के माध्यम से कैंसर उपचार, सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग करने की संभावना है। चारों संस्थानों की क्षमताओं को एकीकृत करने से चिकित्सा सेवाओं के समन्वय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है।
उपराज्यपाल की मंजूरी, जल्द जारी होंगे टेंडर
दिल्ली के चार बड़े सरकारी अस्पतालों को एकीकृत कर एम्स की तर्ज पर मल्टी-स्पेशियलिटी संस्थान बनाने की योजना को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की मंजूरी मिल गई है। दिल्ली सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, दिलशाद गार्डन और आसपास स्थित इन चारों चिकित्सा संस्थानों का संचालन करने वाली अलग-अलग संस्थाओं को समाप्त कर सभी अस्पतालों को एक ही संस्था के अधीन लाया जाएगा।
इस व्यवस्था के लागू होने से चारों अस्पतालों के प्रशासनिक ढांचे को एकीकृत करने और चिकित्सा सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का रास्ता खुलेगा। योजना के तहत आगे की प्रक्रिया को गति देने के लिए जल्द ही टेंडर जारी किए जाने की तैयारी है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के बीच तालमेल बढ़ाना और मरीजों को एकीकृत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है। दिल्ली सरकार के इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की मंजूरी मिल गई है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह के अनुसार, जल्द ही इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। नए संस्थान से क्षेत्र की करीब 60 लाख आबादी को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। बाद में पूरी दिल्ली के लोगों को भी इसका फायदा मिल सकेगा।
चार बड़े अस्पतालों का होगा विलय
प्रस्ताव के तहत गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस) को एकीकृत किया जाएगा। इन संस्थानों का संचालन करने वाली अलग-अलग संस्थाओं के स्थान पर एक साझा संस्थागत व्यवस्था बनाने की योजना है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने बताया कि चारों अस्पतालों के विलय को उपराज्यपाल की मंजूरी मिल गई है और सरकार जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से ट्रांस यमुना क्षेत्र में एम्स जैसा मल्टी-स्पेशियलिटी संस्थान विकसित करने में मदद मिलेगी।
चिकित्सा सुविधाओं के दोहराव में आएगी कमी
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, चारों अस्पतालों के एकीकरण का प्रमुख उद्देश्य चिकित्सा सुविधाओं के दोहराव को कम करना और मौजूदा बुनियादी ढांचे तथा कर्मचारियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। अलग-अलग संस्थानों में उपलब्ध विशेषज्ञ सेवाओं और संसाधनों को एकीकृत व्यवस्था के तहत उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर समन्वय संभव होगा। साथ ही, मरीजों को जरूरत पड़ने पर एक चिकित्सा इकाई से दूसरी इकाई में रेफर करने की प्रक्रिया भी आसान हो सकेगी। फिलहाल, अलग-अलग अस्पतालों के बीच समन्वय की कमी के कारण मरीजों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मरीजों को एक ही व्यवस्था में मिलेंगी विशेषज्ञ सेवाएं
चारों संस्थानों की विशेषज्ञता को एक साथ लाने से मरीजों को विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए अधिक समन्वित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावना है। कैंसर उपचार, सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा। सरकार की योजना का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार में आने वाली प्रशासनिक तथा समन्वय संबंधी बाधाओं को कम करना है। स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, इस परियोजना से ट्रांस यमुना क्षेत्र की करीब 60 लाख आबादी को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके बाद दिल्ली के अन्य हिस्सों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर समन्वित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकता है।
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