अभनपुर। नवरात्रि पर्व के दौरान अभनपुर क्षेत्र के ग्राम जुलुम में आयोजित राज्य स्तरीय कवि सम्मेलन में देर रात तक साहित्य और हास्य का रंग जमा रहा। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से पहुंचे कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को खूब हंसाया। हास्य-व्यंग्य के साथ सुरमय गीतों और जीवन-दर्शन से जुड़ी रचनाओं ने भी लोगों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम रात 2 बजे तक चला और इस दौरान श्रोता तालियों के साथ रचनाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।

बता दें कि ग्राम पंचायत जुलुम और राजीव लोचन साहित्य संस्था रायपुर ने मिलकर इस कवि सम्मेलन का आयोजन किया था। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों के साथ स्थानीय नागरिकों की भागीदारी रही। आयोजकों के मुताबिक, सम्मेलन में प्रस्तुत रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा और देर रात तक कार्यक्रम में बने रहे।
मां सरस्वती की वंदना के साथ हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती और राजीव लोचन महाराज के चित्रों पर अगरबत्ती-धूप जलाकर पूजा-अर्चना के साथ हुई। राजीव लोचन साहित्य संस्था रायपुर के प्रांतीय अध्यक्ष ऋषि साव, संरक्षक मुरारी लाल साव, राजेश चौहान और डॉ. राजेन्द्र पाटकर ‘स्नेहिल’ के साथ सरपंच अन्नपूर्णा साहू (सोनपैरी) और खोमिन साहू (जुलुम) ने पूजन किया। इसके बाद दिलीप टिकरिहा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की और कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई।
हास्य-व्यंग्य से लेकर नीति के दोहों तक सजी महफिल

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए 12 कवियों और दो कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर किया, वहीं गीतों ने माहौल को संगीतमय बना दिया। जीवन-दर्शन और नीति पर आधारित दोहों के जरिए रचनाकारों ने मनोरंजन के साथ सीख भी दी।
रचनाओं के पाठ के दौरान लगातार तालियां गूंजती रहीं। कार्यक्रम में शामिल कवियों ने अलग-अलग विषयों पर अपनी बात रखी। हास्य, व्यंग्य, गीत और विचार प्रधान रचनाओं के मेल ने सम्मेलन को विविधता दी। श्रोता रात दो बजे तक कार्यक्रम में मौजूद रहे और प्रस्तुतियों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे।
डॉ. राजेन्द्र पाटकर ‘स्नेहिल’ ने संभाला मंच संचालन
कवि सम्मेलन का संचालन डॉ. राजेन्द्र पाटकर ‘स्नेहिल’ ने किया। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार और छत्तीसगढ़ के परिचित मंच संचालकों में शामिल पाटकर ने अपनी कवित्त शैली में कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। उनकी मंच संचालन शैली ने प्रस्तुतियों के बीच तालमेल बनाए रखा।
इस मौके पर जुलुम की नव दुर्गोत्सव समिति के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया। आयोजकों के मुताबिक, पूरे आयोजन के दौरान माहौल शांतिपूर्ण रहा और देर रात तक महिलाओं सहित स्थानीय लोगों की भागीदारी बनी रही।
रचनाकारों को अंगवस्त्र और लिफाफे देकर किया सम्मानित
सम्मेलन में शामिल रचनाकारों को सम्मान स्वरूप अंगवस्त्र और लिफाफे भेंट किए गए। कवियों ने ठहरने, भोजन और आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ऋषि साव और दोनों सरपंचों के प्रति आभार जताया।
कार्यक्रम में ऋषि साव, मुरारी लाल साव, डॉ. राजेन्द्र पाटकर ‘स्नेहिल’, राजेश चौहान, हेम लाल साहू ‘निर्मोही’, पंखुरी मिश्रा, निवेदिता वर्मा, धनराज साहू ‘सुरता’, हबीब खान ‘समर’, दिलीप टिकरिहा, मिनेश साहू, ईश्वर साहू ‘बंधी’ और जगन्नाथ निषाद प्रमुख रूप से शामिल रहे।

आयोजन में नवजागरण युवा दुर्गोत्सव समिति, बाजार चौक के राजेन्द्र वर्मा, योगेश साहू, टोकेश्वर वर्मा, सीताराम पॉल, ईश्वरी यादव, अवधराम और पारसमणी साहू सहित आसपास के नागरिक भी उपस्थित रहे। आयोजकों ने सम्मेलन को सफल बताते हुए उम्मीद जताई कि इस तरह के साहित्यिक आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में कविता और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद करेंगे।
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