हेमंत शर्मा, इंदौर। Exclusive Story: फिल्मों में अलग-अलग किरदार निभाने वाले अभिनेता संजय मेहता इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘श्रीरामभूमि’ को लेकर चर्चा में हैं। 10 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके संजय मेहता ने ‘फिल्मिस्तान’, ‘मोहल्ला अस्सी’, ‘धड़क 2’, ‘ड्राई डे’, ‘धुरंधर’ और ‘द केरला स्टोरी 2’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं। कई फिल्मों में उन्होंने निगेटिव किरदार भी निभाए हैं। लेकिन इस बार चर्चा फिल्मी किरदार की नहीं, बल्कि उज्जैन के उस मुद्दे पर अभिनेता की बेबाक राय की है, जिसने पिछले दिनों शहर की सियासत और कानून-व्यवस्था दोनों को सवालों के घेरे में ला दिया।

मंदिर हटे तो विरोध नहीं, मस्जिद की बारी आई तो पत्थर क्यों?

एक्टर संजय मेहता से जब उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों और विकास कार्यों के लिए धार्मिक स्थलों को हटाए जाने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि विकास कार्य किसी एक धर्म या समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मास्टर प्लान के तहत सड़क या दूसरी विकास योजनाओं के लिए धार्मिक स्थल हटाने की जरूरत पड़ती है और उसके लिए दूसरी जगह की व्यवस्था की जाती है, तो इसे स्वीकार करना चाहिए। उनका कहना था कि विकास के रास्ते में किसी तरह की धार्मिक जिद नहीं होनी चाहिए।

‘पत्थर चलाकर किसके खिलाफ लड़ रहे हैं?’

उज्जैन में कार्रवाई के दौरान पथराव की स्थिति को लेकर संजय मेहता ने दो टूक कहा कि पत्थर चलाने का कोई मतलब नहीं है। उनके मुताबिक, अगर सरकार किसी धार्मिक स्थल को हटाकर दूसरी जगह देने की व्यवस्था कर रही है, तो उस व्यवस्था को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार जनता की चुनी हुई सरकार है, तो आखिर पत्थर किसके खिलाफ चलाए जा रहे हैं? संजय मेहता की यह बात सीधे तौर पर उन लोगों के लिए संदेश थी, जिन पर उज्जैन में कार्रवाई के दौरान पथराव करने के आरोप लगे हैं।

दुबई का उदाहरण देकर समझाया विकास का मॉडल

संजय मेहता ने बातचीत के दौरान दुबई का उदाहरण भी दिया। उन्होंने बताया कि वहां भी विकास और सड़क निर्माण के दौरान धार्मिक स्थल प्रभावित होते हैं तो दूसरी जगह व्यवस्था किए जाने का उदाहरण उन्होंने देखा है। उनका कहना था कि कई धार्मिक स्थल पुराने समय की परिस्थितियों के हिसाब से बने होते हैं, लेकिन समय के साथ शहरों का मास्टर प्लान और जरूरतें बदलती हैं। इसलिए विकास योजनाओं के मुताबिक बदलाव को स्वीकार करने की मानसिकता होनी चाहिए। हालांकि उज्जैन में धार्मिक स्थलों को लेकर चल रही कार्रवाई और उससे जुड़े दावों पर प्रशासन और संबंधित पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। ऐसे में संजय मेहता की टिप्पणी को उनकी व्यक्तिगत राय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

अब ‘श्रीरामभूमि’ में फिर विलेन के किरदार में नजर आएंगे संजय मेहता

उज्जैन विवाद पर अपनी राय रखने वाले संजय मेहता जल्द ही बड़े पर्दे पर एक अलग भूमिका में दिखाई देंगे। उनकी आने वाली फिल्म ‘श्रीरामभूमि’ राम मंदिर निर्माण से जुड़े लंबे संघर्ष की कहानी पर आधारित बताई गई है। संजय मेहता के मुताबिक, फिल्म में राम मंदिर निर्माण की पृष्ठभूमि, उससे जुड़ा संघर्ष, अलग-अलग लोगों की भूमिका और सुप्रीम कोर्ट में हुई कानूनी प्रक्रिया को कहानी के रूप में दिखाने की कोशिश की गई है। फिल्म का निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह कर रहे हैं।

फिल्म में सैयद जलालुद्दीन का किरदार

संजय मेहता ने बताया कि ‘श्रीरामभूमि’ में वह सैयद जलालुद्दीन का किरदार निभा रहे हैं। उनके मुताबिक यह फिल्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके किरदार से जुड़े कई पहलू दर्शकों के सामने आएंगे। दिलचस्प बात यह है कि संजय मेहता अपने करियर में कई अलग-अलग निगेटिव किरदार निभा चुके हैं। ‘धुरंधर’ में उन्होंने अब्दुल भुट्टोवी का किरदार निभाया, जबकि ‘द केरला स्टोरी 2’ में भी उनका किरदार निगेटिव भूमिका में था, लेकिन अभिनेता का कहना है कि किसी किरदार को निभाते समय वह उसे धर्म या जाति से जोड़कर नहीं देखते। उनके लिए अभिनेता का काम अलग-अलग इंसानी किरदारों को समझना और निर्देशक की सोच के मुताबिक उन्हें पर्दे पर उतारना है।

अभिनेता बोले- किरदार कोई भी हो, उसे निभाना ही चुनौती

संजय मेहता का कहना है कि एक कलाकार की कोशिश होती है कि वह जीवन के अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। पुलिस अधिकारी हो, जज हो, पत्रकार हो या किसी दूसरे समुदाय का व्यक्ति- कलाकार के लिए हर भूमिका अपने आप में एक चुनौती होती है। उनके मुताबिक फिल्मों में अभिनेता को पूरी आजादी नहीं होती। कहानी, लेखक और निर्देशक की सोच के दायरे में रहते हुए कलाकार अपनी रचनात्मकता जोड़ता है और शायद यही वजह है कि उज्जैन की गलियों से निकला यह अभिनेता अब पर्दे पर ऐसे किरदार निभा रहा है, जो वास्तविक जीवन के बेहद संवेदनशील सवालों से टकराते हैं। उज्जैन की शाही मस्जिद का विवाद हो या ‘श्रीरामभूमि’ की कहानी- संजय मेहता की बातचीत में एक बात साफ नजर आई कि पर्दे का किरदार और असल जिंदगी की राय, दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m