त्योहारों के इस पावन और बड़े मौसम के बीच आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक और भारी बोझ आन पड़ा है। दिवाली की खुशियों के बीच ईंधन कंपनियों द्वारा CNG की दरों में की गई बढ़ोतरी ने आम नागरिकों, मिडिल क्लास और रोज़मर्रा के वाहन चालकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। गुजरात के अहमदाबाद शहर में CNG की कीमतों में 2.30 रुपये प्रति किलोग्राम की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस नए बदलाव के बाद शहर में CNG की नई दर 100.77 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है, जो पहले 98.47 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

CNG की कीमत का ₹100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर जाना वाहन चालकों और स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है। दिवाली के समय जब परिवार अपने बजट को संतुलित करने की कोशिश कर रहे होते हैं, तब ईंधन की कीमतों में इस तरह का उछाल पूरे महीने का हिसाब-किताब बिगाड़ने के लिए काफी है।

मध्यम वर्ग और ऑटो-टैक्सी चालकों पर सीधा असर

इस बढ़ोतरी का सबसे गंभीर और सीधा प्रभाव उन लोगों पर पड़ा है जिनकी आजीविका पूरी तरह से सड़क परिवहन पर निर्भर है। शहर में रोज़ाना ऑटो-रिक्शा, कैब, टैक्सी चलाने वाले ड्राइवर और ऑफिस आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोग पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों से बचने के लिए CNG गाड़ियों का सहारा लेते हैं। अब जब वैकल्पिक ईंधन की दरें ही ₹100 के पार निकल गई हैं, तो रोजाना का आवागमन और ढुलाई बेहद महंगी हो जाएगी।

स्थानीय रिक्शा चालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन के दाम बढ़ने से उनका रोजाना का मुनाफा काफी घट गया है। कमाई का बड़ा हिस्सा केवल गैस भरवाने में चला जाता है, जिससे परिवार चलाना और त्योहार मनाना मुश्किल होता जा रहा है।

सब्जियों और दैनिक सामान के महंगे होने की आशंका

CNG की दरों में इस इजाफे का असर सिर्फ गाड़ियों के ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। कमर्शियल गाड़ियों में CNG का इस्तेमाल बढ़ने के कारण माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) का खर्च भी खुद-ब-खुद बढ़ जाता है। इससे बाजार में आने वाली हरी सब्जियों, दूध, फलों और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी संभावना बन गई है।

त्योहारों की खरीदारी के दौरान लोग पहले से ही विभिन्न सामानों के बढ़े हुए दामों से परेशान थे, ऐसे में ईंधन की दरों में हुई इस वृद्धि ने ‘आग में घी’ डालने जैसा काम किया है। आम नागरिकों और व्यापारी संगठनों का कहना है कि त्योहारों के इस संवेदनशील समय में कंपनियों और प्रशासन को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि आम जनता को कुछ राहत मिल सके।

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