दिल्ली के चिड़ियाघर पर एक बार फिर वायरस का खतरा मंडराता नजर आ रहा है। बर्ड फ्लू(Bird Flu) के कारण लंबे समय तक बंद रहने के बाद हाल ही में आगंतुकों के लिए खोले गए चिड़ियाघर में अब रैबीज को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है। पिछले सप्ताह चिड़ियाघर में दो चौसिंगों (हिरण की एक प्रजाति) की मौत हो गई थी। जू से जुड़े अधिकारियों ने इन मौतों के पीछे रैबीज की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया है, हालांकि इस मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। घटना के बाद चिड़ियाघर प्रशासन सतर्क हो गया है और मामले की जांच की जा रही है। विशेषज्ञों की राय और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
चिड़ियाघर से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार और शुक्रवार को हुई ये मौतें अचानक और अप्रत्याशित थीं। उन्होंने कहा कि रेबीज की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अधिकारी के मुताबिक, एक चौसिंगा की मौत उसके बाड़े में हुई, जबकि दूसरे को हालत बिगड़ने पर इलाज के लिए शिफ्ट किया गया था, जहां उसकी भी मौत हो गई। अधिकारी ने बताया कि मृत जानवरों के मुंह पर झाग (फोम) पाया गया, जो रेबीज संक्रमण की ओर इशारा करता है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
एहतियात के तौर पर चिड़ियाघर में बचे हुए दोनों चौसिंगा को क्वारंटीन में रखा गया है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि वर्ष 2016 में चिड़ियाघर में चीतल (चित्तीदार हिरण) के बीच रैबीज का बड़ा प्रकोप सामने आया था, जिसमें कुछ ही समय में 30 से अधिक चीतलों की मौत हो गई थी। उस समय संक्रमण का कारण नेवले के काटने को माना गया था। एक अधिकारी ने कहा, “फिलहाल उसी तरह के संभावित कारणों की जांच की जा रही है।” एक अन्य अधिकारी ने मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि रैबीज की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और यह संक्रमण चूहों या अन्य छोटे जानवरों के माध्यम से फैल सकता है।
अधिकारी ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में परिसर में चूहों को नियंत्रित करने के लिए चूहे मारने वाले जहर (रेट पॉइजन) का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए यह भी जांच का विषय है कि कहीं इसका असर चौसिंगा पर तो नहीं पड़ा। गौरतलब है कि चौसिंगा को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (संशोधित), 2022 की अनुसूची के तहत संरक्षित प्रजाति का दर्जा प्राप्त है। यह हिरण मध्य, दक्षिण और पश्चिमी भारत का मूल निवासी है, जबकि नेपाल में भी इसकी सीमित आबादी पाई जाती है। चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी और उसी के आधार पर आगे के कदम उठाए जाएंगे।
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