सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आयोजकों और प्रायोजकों से समाज में वैमनस्य फैलाने वाले कथावाचकों को कार्यक्रमों में नहीं बुलाने की अपील की. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को मंच देने से आयोजकों को सामाजिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों और प्रायोजकों से विवादित बयान देने वाले कथावाचकों को मंच नहीं देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ऐसे कथाकार अपने बयानों से समाज में वैमनस्य पैदा करते हैं और उन्हें आमंत्रित करने वाले आयोजकों को भी जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है.
आयोजकों को दी सलाह
अखिलेश यादव ने जारी बयान में कहा कि शासन-प्रशासन के साथ ही ऐसे कथाकारों के कार्यक्रम कराने वाले आयोजकों और प्रायोजकों को भी उनसे दूरी बनानी चाहिए. उनके मुताबिक, कुछ लोग वेशभूषा और बोलचाल से कथावाचक नजर आते हैं, लेकिन कथा और प्रवचन को व्यवसाय की तरह करते हैं.
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग अपनी भौतिक उपलब्धियों का प्रदर्शन करते हैं और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए अनर्गल बयान देते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए धन ही धर्म बन गया है.
आयोजकों को नुकसान की चेतावनी
अखिलेश यादव ने कहा कि विवादित बयान देने वाले कथाकार राजनीतिक संरक्षण के कारण बच सकते हैं, लेकिन कार्यक्रम आयोजित कराने वाले लोगों को उसी शहर में जनता के बीच रहना होता है. उनके अनुसार, ऐसे बयानों से पैदा होने वाले सामाजिक तनाव का असर आयोजकों और प्रायोजकों पर भी पड़ सकता है.
उन्होंने कहा कि श्रद्धालु ऐसे बयानों को आयोजकों और प्रायोजकों की सहमति से जोड़कर देख सकते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर उनकी छवि प्रभावित होगी और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
अच्छे वक्ताओं को बुलाने की अपील
सपा अध्यक्ष ने आयोजकों से समाज और सनातन परंपरा के बीच दूरी बढ़ाने वाले लोगों को प्रोत्साहन नहीं देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि ऐसे कथाकारों को मंच देना ईशनिंदा में भागीदार बनने जैसा हो सकता है.
अखिलेश यादव ने कहा कि देश में कई ऐसे विचारक और वक्ता मौजूद हैं, जिन्हें वैदिक और औपनिषदिक ज्ञान के साथ महाकाव्यों की समझ है. उन्होंने आयोजकों और प्रायोजकों से ऐसे विद्वानों, संवेदनशील वक्ताओं और सद्भावपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोगों को आमंत्रित करने की अपील की, ताकि उनके विचारों से समाज और मानव जीवन को बेहतर बनाने में मदद मिले.

