ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में आरोपियों की ओर से दायर की गई स्थानांतरण याचिका को खारिज कर दिया गया है। आरोपियों ने याचिका में कहा था कि पुलिस ने उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया। अब इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। एफटीसी-1 में गवाहों की गवाही दर्ज की जाएगी।

परिजनों ने किया था जमकर विरोध

आरोपियों के वकील ने 8 जनवरी को एफटीसी से किसी अन्य अदालत में मामला स्थानांतरित करने मांग की थी। जिसका मृतक के परिजनों ने जमकर विरोध किया। यह याचिका उस दौरान दाखिल की गई थी जब मृतक की पत्नी 23 दिसंबर 2015 के फैसले के बाद दैनिक आधार पर सुनवाई शुरू होने पर अपना बयान दर्ज कराने फास्ट ट्रैक कोर्ट पहुंची थी। हालांकि गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि मामला स्थानांतरित करने का कोई ठोस आधार नहीं बनता है।

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क्या है पूरा मालमा

बता दें कि यह पूरा 28 सितंबर 2015 को बिसाहड़ा गांव का है। जहां स्थानीय मंदिर से गोहत्या की अफवाह फैलाई गई। इसके बाद उग्र भीड़ उमड़ गई और अखलाक के घर के बाहर जमा हो गई। इस दौरान अखलाक और उसके बेटे को घर से खींचकर जबरदस्ती निकाला गया और लाठियों, सरियों व ईंटों से उन्हें बेरहमी से पीटा गय। जिसे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाने पर अखलाक की मौत हो गई। जबकि उसका बेटा दानिश गंभीर रूप से चोटिल हो गया। उसकी सर्जरी करानी पड़ी।