दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी(Al-Falah University) के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को जालसाजी और अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से दर्ज कराई गई दो एफआईआर के आधार पर की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुधवार को गिरफ्तारी की पुष्टि की।

 लाल किला धमाके के बाद सामने आया मामला

पुलिस के मुताबिक, यह मामला लाल किले के पास हुए धमाके की जांच के दौरान सामने आया। इसके बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संचालन से जुड़ी कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की जांच शुरू की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की और आगे की कानूनी कार्रवाई की।

अधिकारी के अनुसार, इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही अपनी ओर से जांच शुरू कर चुका था। ईडी की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने जावेद अहमद सिद्दीकी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई।

पेशी के बाद पुलिस रिमांड की मिली अनुमति

गिरफ्तारी के बाद जावेद अहमद सिद्दीकी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने पुलिस को चार दिन की हिरासत (पुलिस रिमांड) की अनुमति दी। पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर गहन पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और मामले से संबंधित और जानकारियां जुटाई जा रही हैं। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

क्यों खारिज हुई यूनिवर्सिटी की अपील?

मामले की सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी का पक्ष सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने अगली तारीख के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। यूनिवर्सिटी की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि वे अभी तक पुलिस के आरोपपत्र और उससे जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन नहीं कर पाए हैं और इसके लिए समय चाहिए। वकीलों का कहना था कि आरोपपत्र से जुड़े दस्तावेज करीब 10 हजार पन्नों के हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए पर्याप्त समय जरूरी है।

दरअसल, जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों की ओर से मामले दर्ज हैं। फिलहाल सिद्दीकी दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं और ईडी के मामले में भी उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो रही है। सिद्दीकी के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि वे अपने मुवक्किल से मुलाकात नहीं कर पाए हैं, क्योंकि वह पहले से ही क्राइम ब्रांच की हिरासत में हैं।

गौरतलब है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी उस समय सुर्खियों में आई थी, जब फरीदाबाद में एक कश्मीरी डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई थी, जिसके पास से करीब 360 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए थे। पुलिस के अनुसार, इस आरोपी का संबंध अल-फलाह यूनिवर्सिटी से था। यह कार्रवाई फरीदाबाद पुलिस और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई थी। आरोपी की पहचान मुजम्मिल शकील के रूप में हुई है, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी में शिक्षक के तौर पर कार्यरत था।

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