पैसों की खातिर मौत के बाद भी मरीज को वेंटिलेटर में रखने का आरोप, शरीर से बदबू आने के बाद परिजनों का हंगामा

चंद्रकांत देवांगन, दुर्ग। कोरोनाकाल मे जहाँ स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों के कार्यों को जनता की सराहना मिल रही है, वही दुर्ग जिले में नेहरू नगर स्थित हाईटेक अस्पताल में डॉक्टरों पर मानवता को शर्मसार करने का आरोप एक मरीज के परिजनों ने लगाया है। परिजनों का आरोप है कि मरीज की मृत्यु होने के बाद भी अस्पताल ने पैसा उगाही के लिए उसे वेन्टीलेटर पर रखा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारी से मामले की जांच की मांग की है।

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राजनांदगांव निवासी सिराजुन निशा उम्र 62 वर्ष, जो कि पैर में दर्द की शिकायत लेकर 4 मई को हाई टेक अस्पताल पहुंची थी. जहाँ न्यूरोलॉजी से संबंधित डॉक्टर से सामान्य उपचार के बाद अपने घर चली गई। घर वापस जाने पर महिला की तबियत लगातार बिगड़ने लग गयी, जिसे दोबारा 13 मई को इलाज के लिए हाईटेक अस्पताल लाया गया। जहाँ पर जांच के बाद महिला की आंतो में इंफेक्शन की बात रिपोर्ट में सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने महिला के परिजनों को ऑपरेशन की सलाह देते हुए उसका ऑपरेशन किया जिसके बाद लगातार उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। बीते 2-3 दिनों से मरीज के शरीर मे कोई भी सुधार न दिखने व शरीर से बदबू आने की बात परिजनों ने डॉक्टरों से कही जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे मरीज की हालत में सुधार आने में वक्त लगने की बात कही।

बीती रात परिजनों ने मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किये जाने की मांग रखते हुए अस्पताल से डिस्चार्ज करने के लिए हंगामा तक किया. शुक्रवार सुबह जब मरीज को दुर्ग के जिला अस्पताल में ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत करार देते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अपने परिजन की मृत्यु से दुखी होकर मृतक के परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि हाईटेक अस्पताल के प्रबंधन ने मरीज की मौत होने के बावजूद पैसे उगाही करने के उद्देश्य से इलाज जारी रखा।

वही इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों का कहना था कि मरीज का इलाज करने में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं की गई। परिजनों द्वारा लगाया जा रहा आरोप बेबुनियाद है, अस्पताल प्रबंधन ने हर संभव कोशिश की है कि मरीज की जान बच सके और सारा लाइव सपोर्ट सिस्टम देकर ही परिजनों की अनुमति के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दी गई। मरीज की हालात उतनी अच्छी नही थी कि वो शिफ्टिंग को सह सके शायद इसी वजह से रास्ते में उसकी मौत हो गई हो। हाईटेक अस्पताल ने लगातार परिजनों की काउंसलिंग के बाद ही इलाज जारी रखा था साथ ही जिला अस्पताल शिफ्ट करते वक्त अस्पताल प्रबंधन की तरफ से नर्स और आईसीयू के प्रमुख साथ मे गए थे कि मरीज को सही सलामत पहुंचाया जा सके। अस्पताल प्रबंधन ने मृतक के परिजनों पर भी झूमा झटकी व हंगामा मचाने का आरोप लगाया है पर अब तक इस बारे में कोई शिकायत नही की गई है। बहरहाल इस मामले के बाद NSUI के प्रदेश सचिव ने भी मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी से मामले की जांच की बात कही है।

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