सुजान सिंह, अमरवाड़ा। मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक तरफ वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जिम्मेदार वन अधिकारियों की घोर लापरवाही बेजुबानों की जान पर भारी पड़ रही है। ताज़ा मामला छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सिंगोड़ी से सामने आया है, जहाँ समय पर वन अमला न पहुँचने के कारण सूखे कुएं में गिरे हिरण के एक मासूम बच्चे की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।
सूखे कुएं में गिरे थे दो हिरण के बच्चे
जानकारी के अनुसार, सिंगोड़ी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप एक सूखे कुएं में दो हिरण के बच्चे गिर गए थे। स्थानीय ग्रामीणों ने जैसे ही यह देखा, तुरंत वन विभाग के अधिकारियों, डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड को इसकी सूचना दी। लेकिन संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब सूचना मिलने के बावजूद घंटों तक वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा।
2 घंटे की देरी बनी मौत का कारण
लगभग 2 घंटे तक जब वन विभाग की टीम नहीं आई, तब ग्रामीणों ने खुद हिम्मत दिखाई और काफी मशक्कत के बाद दोनों हिरण के बच्चों को कुएं से बाहर निकाला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी—अत्यधिक चोट और तड़प के कारण एक बच्चे ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे बच्चे की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
ग्रामीणों पर ही भड़कीं डिप्टी रेंजर
घटना के पूरे 2 घंटे बाद जब डिप्टी रेंजर शर्मिला खण्डाते मौके पर पहुँचीं, तो अपनी गलती मानने के बजाय उन्होंने ग्रामीणों पर ही अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि डिप्टी रेंजर ने उन्हें डराते-धमकाते हुए कहा, “तुम लोगों ने फोटो और वीडियो क्यों शेयर किए? तुम कौन होते हो फोटो-वीडियो बनाने वाले?”
मुख्यालय से नदारद रहने का आरोप
स्थानीय निवासियों शेख जमील और शेख नाजिम का कहना है कि डिप्टी रेंजर शर्मिला खण्डाते अक्सर अपने मुख्यालय से नदारद रहती हैं और किसी भी आपात स्थिति या घटना की सूचना देने पर इसी तरह लापरवाही बरतती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते वन विभाग की टीम पहुँच जाती, तो बेजुबान हिरण के बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। उग्र ग्रामीणों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि ऐसी लापरवाह अधिकारी का तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरण किया जाए।
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