संजीव शर्मा, कोंडागांव। बस्तर की धरती पर दशहरा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामूहिक उत्साह का ऐसा उत्सव है, जिसमें हर गांव की अपनी एक कहानी है। कहीं देवी-देवताओं की आराधना होती है, तो कहीं लोकपरंपराएं अपनी अनूठी छाप छोड़ती हैं। ऐसी ही एक दिलचस्प परंपरा केशकाल विधानसभा क्षेत्र के अंतिम छोर पर बसे ग्राम मैनपुर में देखने को मिलती है। यहां दशहरा मेले में हर साल ग्रामीण अपनी कल्पनाशीलता और हुनर से कुछ ऐसा रचते हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाता है। इस बार मेले में हेलीकॉप्टर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पहुंचने का प्रतीकात्मक दृश्य खास आकर्षण रहा। ग्रामीणों की मेहनत से तैयार इस अनूठी झांकी को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे।

जब गांव के मेले में हेलीकॉप्टर बना आकर्षण

मैनपुर के दशहरा मेले में इस बार हेलीकॉप्टर का प्रतीकात्मक मॉडल लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। ग्रामीणों ने इसके माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगमन का दृश्य प्रस्तुत किया। आधुनिक राजनीतिक जीवन से जुड़े इस प्रतीक को पारंपरिक दशहरा आयोजन का हिस्सा बनाकर ग्रामीणों ने मेले को नया रंग दिया। हेलीकॉप्टर के साथ आकर्षक झांकियां और विशेष रथ भी तैयार किए गए थे। इन्हें देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

इस आयोजन की खासियत यह है कि यहां की परंपरा में हर साल कुछ नया देखने को मिलता है। ग्रामीण अपने आसपास की घटनाओं, चर्चित व्यक्तित्वों और समसामयिक विषयों को अपनी कल्पनाशीलता के जरिए झांकियों में जगह देते हैं। यही अनूठा अंदाज मैनपुर के दशहरा मेले को दूसरे आयोजनों से अलग पहचान देता है।

एक महीने की मेहनत, गांव के लोगों का सामूहिक प्रयास

मेले में दिखाई देने वाली आकर्षक झांकियों और रथों के पीछे ग्रामीणों की करीब एक महीने की मेहनत छिपी होती है। गांव के लोग मिलकर योजना बनाते हैं, जरूरी सामग्री जुटाते हैं और अपने हाथों से अलग-अलग स्वरूप तैयार करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी रचनात्मकता में कोई कमी नहीं दिखती।

यहां तैयार होने वाली झांकियां केवल सजावट का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों की एकजुटता और अपनी परंपरा के प्रति लगाव की पहचान भी हैं। हर साल इस आयोजन के लिए गांव के लोग मिल-जुलकर योगदान देते हैं। किसी के हाथ में निर्माण की जिम्मेदारी होती है, तो कोई साज-सज्जा में जुटता है। सबकी भागीदारी से मेले का स्वरूप निखरता है।

जनप्रतिनिधियों ने भी देखी ग्रामीणों की अनूठी परंपरा

मैनपुर के दशहरा मेले में कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर सांसद महेश कश्यप और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम भी शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों द्वारा तैयार की गई झांकियों और रथों को देखा तथा उनकी मेहनत और रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने इस तरह की परंपराओं को बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

ग्रामीणों की ओर से सीमित संसाधनों में इतने बड़े आयोजन को स्वरूप देना इस बात का उदाहरण है कि लोकपरंपराएं केवल आयोजनों से नहीं, बल्कि लोगों की सक्रिय भागीदारी से जीवित रहती हैं। ऐसी परंपराओं को व्यापक पहचान मिलने से क्षेत्र की सांस्कृतिक विशिष्टता भी सामने आती है।

रावण दहन के साथ हुआ उत्सव का समापन

दिनभर मेले में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही बनी रही। झांकियों, रथों और हेलीकॉप्टर के प्रतीकात्मक मॉडल को देखने के लिए लोगों में उत्साह दिखाई दिया। पारंपरिक उल्लास के बीच आयोजित दशहरा उत्सव का समापन विधि-विधान से रावण दहन के साथ हुआ।

मैनपुर का दशहरा यह संदेश देता है कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान केवल बड़े और प्रसिद्ध आयोजनों तक सीमित नहीं है। दूरस्थ गांवों में भी ऐसी लोकपरंपराएं मौजूद हैं, जो पीढ़ियों से लोगों को जोड़ती आ रही हैं। यहां का हेलीकॉप्टर मॉडल हो या आकर्षक रथ और झांकियां, हर रचना के पीछे ग्रामीणों की कल्पनाशीलता, मेहनत और सामूहिक भावना दिखाई देती है। यही वजह है कि मैनपुर का दशहरा मेला अपनी अलग पहचान के साथ बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक विरासत की एक अनूठी मिसाल बनकर सामने आता है।

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