पटना। बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच विवाद के बाद घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। जेडीयू के एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार का खुलकर विरोध करने के बाद अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद नीलम देवी को 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से हटा दिया गया, जिससे उनका राज्यमंत्री का दर्जा समाप्त हो गया। सोमवार को उन्हें पटना स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया गया। अब अनंत सिंह से जुड़े दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।
नीरज कुमार के विरोध से शुरू हुआ विवाद
जेडीयू ने बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीट से अपने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। इस बीच मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया। उन्होंने नीरज कुमार को हराने की बात भी कही थी। इसी घटनाक्रम के बाद पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की।
24 अक्टूबर को जेडीयू ने दोनों की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी कार्रवाई करने की मांग विधानसभा अध्यक्ष से की है। इस मामले में आगे का फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना है।
बंगला खाली करने का नोटिस
जेडीयू से निष्कासन के बाद नीलम देवी को राज्य स्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से भी हटा दिया गया। इस समिति में सदस्य होने के कारण उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था और इसी आधार पर पटना के मॉल रोड स्थित सरकारी बंगला आवंटित किया गया था। 26 अक्टूबर को जारी सरकारी आदेश के बाद भवन निर्माण विभाग ने उन्हें बंगला खाली करने का नोटिस दिया। उन्हें 25 नवंबर 2026 तक आवास खाली करने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद अनंत सिंह और उनके परिवार से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है।
30 अक्टूबर को अहम सुनवाई
अनंत सिंह के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है। 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। यह तारीख इसलिए भी अहम है, क्योंकि दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। शुक्रवार को इस घटना की पहली बरसी भी होगी। चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह और जन सुराज प्रत्याशी के समर्थक दुलारचंद यादव के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान हिंसा हुई और दुलारचंद यादव की मौत हो गई। मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जेल में रहते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आए।
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी मांग है कि अनंत सिंह की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा जेल भेजा जाए। इस कानूनी लड़ाई में जन सुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी भी नीरज कुमार के साथ खड़े हैं। उन्होंने ‘लाइव हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि दुलारचंद यादव को न्याय मिलेगा।
जांच और चार्जशीट का जिक्र
नीरज कुमार की याचिका में बिहार सरकार को पहली और अनंत सिंह को दूसरी पार्टी बनाया गया है। राज्य सरकार ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया। इसमें कहा गया है कि पुलिस जांच में दुलारचंद यादव हत्याकांड के आरोप अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ सही पाए गए हैं। हलफनामे के मुताबिक, मामले की एसडीपीओ और एसपी स्तर पर निगरानी की गई थी। इसके बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। हालांकि, मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण और दोषसिद्धि अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगी।
62 आपराधिक मामलों का भी दिया गया हवाला
नीरज कुमार ने अपनी याचिका में अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा है कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय इस पहलू पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। याचिका में अनंत सिंह की ओर से घोषित 67 आपराधिक मामलों का हवाला दिया गया है।
वहीं, राज्य सरकार के जवाबी हलफनामे में अनंत सिंह के खिलाफ 62 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, वसूली और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं।

