Bihar Politics: जदयू से 6 साल के लिए निष्कासित करने के बाद अब मोकामा विधायक अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दरअसल जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और एमएलसी संजय गांधी आज विधानसभा भवन पहुंचे, जहां उन्होंने विधानसभा सचिव से मुलाकात की। इस दौरान उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए एक पत्र सौंपा। जानकारी के मुताबिक, अनंत सिंह से जुड़े मामले में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के समर्थन में 10 पन्नों के दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य भी विधानसभा सचिव को सौंपे गए हैं।
अनंत सिंह के निष्कासन पर कही ये बात
वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने अनंत सिंह के निष्कासन पर कहा कि, आप लोग भी देख रहे थे कि वह किस तरह से वे पार्टी के विरोध में काम कर रहे थे। पार्टी के एक विधायक होने के बावजूद वे पार्टी की नीतियों, सिद्धांतों और कार्यक्रमों में विश्वास नहीं जता रहे थे। वे पार्टी के घोषित उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार कर रहे थे और विरोधी दल के उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार, नामांकन और अन्य कार्यक्रमों में भाग ले रहे थे।
इसके अलावा वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बारे में भी उल्टी-सीधी बातें कर रहे थे। यह साफ दिख रहा था कि वे पार्टी की गतिविधियों के खिलाफ काम कर रहे हैं। उमेश सिंह ने कहा कि, पार्टी अनुशासन से चलती है और हमारे नेता नीतीश कुमार के संस्कार ही हैं कि पार्टी में अनुशासन और सिद्धांतों को महत्व दिया जाता है।
‘वोट चोरी से सरकार’ वाले बयान पर कही ये बात
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बिहार में ‘वोट चोरी से सरकार’ बनने वाले बयान पर उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि, अब बहुत बातें हो चुकी हैं। बिहार में हमारे विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को सबसे पहले अपने बारे में बताना चाहिए। अगर वे चुनाव जीते हैं, तो क्या वे भी वोट चोरी से चुनाव जीते हैं? उनके 25-25 विधायक हैं, इसलिए बयान देने से पहले उन्हें अपने विधायकों से त्यागपत्र लेकर देना चाहिए। उसके बाद कोई सवाल उठाएं या इस तरह की टिप्पणी करें, तो अच्छा रहेगा।
उन्होंने कहा कि, कांग्रेस की जिन राज्यों में सरकारें चल रही हैं, वहां जब वे चुनाव जीतते हैं, तो चुनाव प्रक्रिया ठीक रहती है, लेकिन जहां हार जाते हैं, वहां आरोप लगाने लगते हैं। इन सब बातों पर हमें हंसी आती है। इस तरह के सवालों पर क्या टिप्पणी की जाए?
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