हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के समकालीन कला परिदृश्य से निकली एक अनूठी प्रतिभा ने वैश्विक मंच पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। कला के विभिन्न आयामों को डिजिटल तकनीक के साथ साधने वाले कलाकार अनमोल माथुर को संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रतिष्ठित ‘द पैट्रन्स वर्ल्ड’ (TPW) अवॉर्ड से नवाजा गया है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान उन्हें ‘फ्लुइड डिजिटल आर्ट’ के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट पेशेवर कार्य, निरंतर कलात्मक साधना और नवाचार के लिए प्रदान किया गया है। 39 वर्षीय अनमोल की कलाकृतियां महज सौंदर्य बोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पृथ्वी, भारतीय सांस्कृतिक जड़ों, सतत विकास और प्राचीन धरोहरों के गंभीर विषयों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने जीवंत करती हैं।

जब रंग कैनवास से निकलकर दुनिया तक पहुंचे

अनमोल की कला का संसार थोड़ा अलग है। उनके लिए पेंटिंग सिर्फ रंगों को एक जगह जमा करने का नाम नहीं, बल्कि विचार को दृश्य में बदलने की प्रक्रिया है। उनके आर्टवर्क में पृथ्वी से जुड़ी संवेदनाएं दिखाई देती हैं। भारतीय संस्कृति की झलक मिलती है और प्राचीन कला एवं गुफा चित्रों की कहानियों को आधुनिक तकनीक के जरिए नए रूप में पेश करने की कोशिश नजर आती है।यही वजह है कि सतत विकास से जुड़े उनके आर्टवर्क को अलग-अलग देशों में सराहना मिली है।

‘पेंटिंग चाहिए, विश्व युद्ध नहीं’

अनमोल की कला का संदेश सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि कला समाज को सोचने का मौका देती है। उनकी सोच है कि दुनिया को पेंटिंग और रचनात्मकता की जरूरत है, विश्व युद्ध की नहीं। एक कलाकार के लिए हर पहलू को एक साथ दिखाना आसान नहीं होता। लेकिन कला की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह बिना शोर किए भी कोई बड़ा संदेश लोगों तक पहुंचा सकती है।

प्राचीन गुफा चित्रों से डिजिटल आर्ट तक का सफर

अनमोल का मानना है कि कला कोई आज की खोज नहीं है। इंसान ने जब अपनी बात शब्दों में कहनी शुरू भी नहीं की थी, तब भी उसने गुफाओं की दीवारों पर अपनी दुनिया दर्ज की थी। गुफा चित्रों से लेकर आज की डिजिटल आर्ट तक कला ने समय के साथ अपना रूप बदला, लेकिन उसका उद्देश्य कहीं न कहीं वही रहा—जो देखा, महसूस किया और समझा, उसे दुनिया के सामने रखना। अनमोल इसी परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश करते हैं।

‘कलाकार सिर्फ कलाकार नहीं, एक दार्शनिक भी होता है’

अनमोल के मुताबिक एक कलाकार सिर्फ तस्वीर नहीं बनाता। वह अपने आसपास की दुनिया को देखता है, उसे समझता है और फिर अपने तरीके से लोगों के सामने रखता है।उनका मानना है कि कलाकार के भीतर एक दार्शनिक भी मौजूद होता है, क्योंकि वह रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने वाली चीजों के पीछे छिपे अर्थ को तलाशने की कोशिश करता है।इसी सोच के साथ अनमोल ने कला को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया।

कभी सोचा नहीं था प्रोफेशनल कलाकार बनेंगे

अनमोल बताते हैं कि उन्होंने कभी यह तय नहीं किया था कि वह प्रोफेशनल कलाकार बनेंगे। लेकिन कला के प्रति लगातार काम करते-करते यही उनकी पहचान बन गई।उनका संदेश युवाओं के लिए साफ है-अगर आपके पास कोई अलग और अनोखा हुनर है, तो उसे पहचानिए और लगातार उस पर काम कीजिए।उनके मुताबिक लक्ष्य हासिल करने के लिए सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं, बल्कि उस प्रतिभा को लगातार निखारने की जरूरत होती है।

‘कला को सोचना आसान, उस पर काम करना मुश्किल’

अनमोल कहते हैं कि कला के बारे में विचार करना आसान है लेकिन उस विचार को वास्तविक रूप देना मुश्किल है।एक कलाकार के सामने हर स्तर पर चुनौती होती है-विचार को समझना, सही माध्यम चुनना, रंगों का इस्तेमाल करना और फिर उस भावना को दर्शक तक पहुंचाना।उनके लिए हर रंग की अपनी कीमत और हर दृश्य की अपनी कहानी है।

32 साल की कला यात्रा… अब अंतरराष्ट्रीय पहचान

39 साल की उम्र में अनमोल अपनी कला यात्रा के करीब 32 साल पूरे कर चुके हैं। इस लंबे सफर में उन्होंने कला की अलग-अलग शैलियों के साथ प्रयोग किया और अब फ्लुइड डिजिटल आर्ट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।उनका काम ‘चेंजमेकर्स’ पहल से भी जुड़ा रहा है। इसी सोच के साथ वह कला को सिर्फ प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि बदलाव की आवाज के तौर पर देखते हैं।दुबई में मिला TPW अवॉर्ड इसी कला यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।

अनमोल के लिए अवॉर्ड से ज्यादा मायने रखती है कला की सोच

अनमोल की कहानी सिर्फ एक अवॉर्ड मिलने की कहानी नहीं है। यह उस सफर की कहानी है जिसमें बचपन से कला से जुड़ा एक कलाकार लगातार सीखता रहा, प्रयोग करता रहा और अपनी कला को नए माध्यमों तक ले गया।कभी गुफाओं की दीवारों पर उकेरी गई तस्वीरें इंसान की कहानी कहती थीं, आज वही कहानी डिजिटल स्क्रीन पर नए रंगों के साथ सामने आ रही है।और अनमोल माथुर की कला यात्रा इसी बदलाव की एक मिसाल है-जहां रंग सिर्फ तस्वीर नहीं बनाते, बल्कि सोच को आकार देते हैं।

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