The greatest wealth is contentment… आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्। इस प्रसिद्ध संस्कृत सुभाषित के आधार पर आरोग्य सबसे बड़ा सौभाग्य है और स्वास्थ्य ही सभी कार्यों की सिद्धि का साधन है। एक प्रसिद्ध अंग्रेजी कहावत है “Wealth may fill your house, but health and happiness fill your life.” इसका अर्थ है ‘धन घर को भर सकता है लेकिन स्वास्थ्य और प्रसन्नता ही जीवन को संपूर्ण बनाते हैं।’

निस्संदेह धन कमाना एक बड़ी सफलता है लेकिन स्वस्थ रहकर उसका सदुपयोग करना वास्तविक समृद्धि है। धनत्रयोदशी और भगवान धन्वंतरि जयंती, धनतेरस में सोने-चाँदी, बर्तन और नए वाहन खरीदने वाले मेरे सुधी पाठकों को इस बात की महत्ता का भी भान होना चाहिए कि यह पर्व स्वास्थ्य, समृद्धि, सुरक्षा और सकारात्मकता का संतुलन स्थापित करने वाला त्योहार है।

समुद्र मंथन के समय आयुर्वेद के जनक और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि का अमृत कलश लेकर प्रकट होना और सतजन में उसका बँटवारा इस बात का संकेत है कि उत्तम स्वास्थ्य पर देवता, देवतुल्य, सात्विक, संतत्व से परिपूर्ण भद्र जनों का प्राथमिक अधिकार है।

Money can’t buy happiness… इस अंग्रेजी कहावत का ईशारा है कि धन से सच्ची खुशी नहीं खरीदी जा सकती साथ ही स्वास्थ्य संवर्धन के लिए अँग्रेज़ी में कहा गया है Take care of your body. It’s the only place you have to live. इसका मतलब होता है अपने शरीर की देखभाल कीजिए क्योंकि रहने के लिए आपके पास यही एक स्थान है। विश्व की सारी संपत्ति की तुलना में अपना स्वस्थ शरीर अधिक मूल्यवान होता है यही कारण है कि जीवन का प्राथमिक सुख निरोगी काया को ही माना गया है।

The greatest riches are health, wisdom and peace of mind. 
स्वास्थ्य, विवेक और मन की शांति ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। समय के साथ परम्पराओं में नई परम्पराएँ जुड़ती चली गई आज धनतेरस समृद्धि प्रदर्शन का पर्व बन गया है लोग अपनी अपनी आर्थिक क्षमता से भी अधिक ख़रीदारी कर रहे हैं।

भारतीय तीज त्योहारों में स्वच्छता, परिवार का साथ, जरूरतमंदों की सहायता जैसी स्थापित परंपराओं का समाज पर कई कारणों से सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।हमारे बहुत से पर्व हमें अनजाने ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। आज किए जाने वाले ‘यम दीपदान’ से जीवन की अनिश्चितता और उसके संरक्षण के संदेश का सम्प्रेषण होता है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥ संस्कृत के इस श्लोक में कामना की गई है कि सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त हों, सभी का जीवन मंगलमय हो और किसी को दुख न मिले। धनतेरस में घर की तिजोरी से पहले अपने स्वास्थ्य, विचारों और व्यवहार को समृद्ध बनाया जाए। Wealth is nothing without health.. इसका आशय है स्वास्थ्य के बिना धन-संपत्ति किसी काम की नहीं। आरोग्य, शांति, संतोष और सद्भाव से बड़ा और सच्चा धन और कुछ नही नही है। Contentment is the greatest form of wealth. संतोष ही समृद्धि का सबसे श्रेष्ठ स्वरूप है।

धनतेरस का पर्व विशेषकर इन तीन संकल्पों के लिए सर्वोत्तम समय है। पहला संकल्प -स्वास्थ्य को सबसे बड़ी सम्पदा मानकर उसकी रक्षा करेंगे। दूसरा- अपनी सामर्थ्य के अनुसार खर्च करते हुए दिखावे से बचा जाएगा और तीसरा संकल्प है अपनी समृद्धि के मान से जरूरतमंदों की सहायता की जाएगी।


संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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