लखनऊ में कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई सवाल उठाए. उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का जिक्र करते हुए मताधिकार की रक्षा को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया.
लखनऊ. कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधायक आराधना मिश्रा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार तथा निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मतदान लोकतंत्र की महत्वपूर्ण आधारशिला है और मताधिकार की सुरक्षा जरूरी है.
आराधना मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सबसे पहले वोट चोरी का मुद्दा उठाया था. उन्होंने हरियाणा की मतदाता सूची में नाम काटे जाने को लेकर राहुल गांधी की ओर से सामने रखे गए दावों का भी उल्लेख किया.
चुनाव आयुक्तों पर सवाल
आराधना मिश्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन उनके आरोप के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ने फैसले अपनी इच्छा के मुताबिक लिए.
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने सितंबर 2023 में बने कानून का हवाला दिया. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली समिति में पहले मुख्य न्यायाधीश की भूमिका का प्रावधान था, लेकिन नए कानून के बाद मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को समिति में शामिल किया गया.
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, वर्तमान में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं. आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक निर्वाचन आयोग बहुसदस्यीय व्यवस्था में काम करता है और निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं.
वोट कटौती का दावा
कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि साढ़े 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बड़ी संख्या में नाम हटाए गए, तो इससे मतदाताओं के अधिकारों पर क्या असर पड़ा.
आराधना मिश्रा ने हरियाणा, पश्चिम बंगाल और बिहार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन राज्यों में काटे गए वोटों की संख्या और भाजपा की जीत के अंतर में समानता दिखाई देती है. पश्चिम बंगाल के संबंध में उन्होंने करीब 30 लाख वोट काटे जाने का दावा किया और कहा कि वहां जीत-हार का अंतर भी लगभग इतना ही था.
ये आंकड़े आराधना मिश्रा और कांग्रेस की ओर से किए गए दावों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं. स्वतंत्र रूप से यह स्थापित तथ्य नहीं है कि कथित तौर पर हटाए गए मतदाता नामों के कारण किसी चुनाव का परिणाम बदला.
चुनाव आयोग से जवाब की मांग
आराधना मिश्रा ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने दोनों चुनाव आयुक्तों से आरोपों पर देश के सामने जवाब देने की मांग की है.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि तीन सदस्यीय व्यवस्था में दो सदस्यों ने 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, तो उनकी बात क्यों नहीं सुनी गई. इन दावों और आपत्तियों के संबंध में चुनाव आयोग का पक्ष भी प्रासंगिक है और मामले पर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं.
राम मंदिर ट्रस्ट का मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आराधना मिश्रा ने अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट को क्लीन चिट दी गई और मामले में शामिल प्रमुख लोगों को बरी कर दिया गया.
उन्होंने कहा कि मामले में 70 लाख रुपये के घोटाले की बात सामने आई, जबकि कांग्रेस का दावा है कि कथित अनियमितता कई हजार करोड़ रुपये की है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने आरोपपत्र दाखिल किया है और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को आरोपी के बजाय गवाह बनाया गया है.
आराधना मिश्रा ने कहा कि कथित मामले की जवाबदेही प्रधानमंत्री कार्यालय की बनती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची और कथित घोटाले से जुड़े दोनों मुद्दों को जनता के बीच उठाएगी.


