कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीति के दिग्गज और कद्दावर मंत्री अशोक चौधरी बुधवार को एक बिल्कुल नए अवतार में नजर आए। जब वे पटना के प्रतिष्ठित एएन (AN) कॉलेज के परिसर में दाखिल हुए, तो उनके साथ सुरक्षाकर्मियों का काफिला तो था, लेकिन उनके हाथ में फाइलों की जगह पॉलिटिकल साइंस का सिलेबस था। यह कोई राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में उनके नए सफर की शुरुआत थी।
खुद की बनवाई बिल्डिंग में बने शिक्षक
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि अशोक चौधरी उसी भवन में छात्रों को पढ़ाने पहुंचे, जिसका निर्माण उन्होंने खुद मंत्री रहते हुए करवाया था। अपनी ही बनाई हुई इमारत में बतौर प्रोफेसर कदम रखना उनके लिए भावुक क्षण था। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसे महादेव का आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा, यह बहुत दुर्लभ होता है कि कोई व्यक्ति मंत्री पद पर रहते हुए छात्रों के बीच प्रोफेसर के रूप में जाए। मुझे खुशी है कि मुझे आज छात्रों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।
नर्वसनेस और 35 साल का अंतराल
इतने वर्षों तक सत्ता के गलियारों में रहने के बाद ब्लैकबोर्ड के सामने खड़ा होना आसान नहीं था। मंत्री चौधरी ने बड़ी बेबाकी से अपनी घबराहट को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 1991 में अपना मास्टर्स (MA) पूरा किया था और अब 2026 में, यानी करीब 35 साल बाद वे दोबारा अकादमिक क्षेत्र में सक्रिय हो रहे हैं। उन्होंने ईमानदारी से कहा, इतने लंबे अंतराल के बाद क्लास लेने को लेकर मैं थोड़ा नर्वस हूं और हल्की एंजायटी (बेचैनी) भी महसूस कर रहा हूं। राजनीति और सक्रिय जीवन के कारण पढ़ाई का अभ्यास छूट गया था, इसलिए यह मेरे लिए एक बड़ी चुनौती है।
तैयारी में नहीं छोड़ी कोई कसर
एक गंभीर शिक्षक की तरह अशोक चौधरी ने क्लास में जाने से पहले पूरी तैयारी की थी। उन्होंने कॉलेज के विभागाध्यक्ष (HOD) से पहले ही सिलेबस मंगवा लिया था और खुद भी पढ़ाई की थी ताकि वे छात्रों की जिज्ञासाओं का सही उत्तर दे सकें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए लिखा कि यह उनके पिता का सपना था जिसे आज वे जी रहे हैं। उनका संकल्प है कि वे राजनीति विज्ञान को केवल एक किताबी विषय नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र को समझने के माध्यम के रूप में पढ़ाएंगे।
शिक्षा और संस्कार का नया संकल्प
अशोक चौधरी का मानना है कि शिक्षा केवल ज्ञान का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाने का एक पवित्र माध्यम है। उनकी यह पहल न केवल छात्रों को प्रेरित करेगी, बल्कि राजनीति और शिक्षा के बीच एक नया सेतु भी स्थापित करेगी।
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