Ashok Gehlot on Narendra Modi Old Statements: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2011 और 2013 के पुराने बयानों का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर भाजपा पर सवाल उठाए हैं।

गहलोत ने पूछा कि जब तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ आंदोलन और सत्ता परिवर्तन की मांग की जा रही थी, तब उसे लोकतंत्र की आवाज बताया जाता था। अब विपक्ष और युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो उसे अराजकता क्यों कहा जा रहा है? उन्होंने SIR में कथित अनियमितताओं, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पुराने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से जुड़े मुद्दे भी उठाए।
मोदी के पुराने बयानों का हवाला देकर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के दो बयानों का जिक्र किया। उनके अनुसार, 6 जून 2011 को मोदी ने कहा था कि यदि उनके हाथ बंधे नहीं होते, तो वे केंद्र सरकार के खिलाफ लड़ाई छेड़ देते। इसके बाद 20 दिसंबर 2013 को मोदी ने कहा था कि जनता केंद्र सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए आक्रामक हो रही है। गहलोत ने इन बयानों के आधार पर भाजपा से सवाल किया कि यूपीए सरकार के खिलाफ विरोध और सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतांत्रिक बताया जाता था, लेकिन आज युवाओं और विपक्ष के आंदोलनों पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
SIR और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जैसे सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा विपक्ष पर हमले कर रही है। गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष और युवाओं पर आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठने पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
2जी, कोलगेट और काले धन के मुद्दे भी उठाए
अशोक गहलोत ने 2014 से पहले हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों का भी जिक्र किया। उन्होंने अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन, बाबा रामदेव के काले धन से जुड़े आंदोलन और 2जी व कोलगेट मामलों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों की याद दिलाई। गहलोत ने सवाल किया कि उस समय नरेंद्र मोदी और भाजपा के दूसरे नेता तत्कालीन सरकार में बदलाव की मांग नहीं कर रहे थे क्या? उन्होंने यह भी पूछा कि उस दौर में काले धन, 2जी और कोलगेट जैसे मुद्दों पर किए गए बड़े-बड़े दावों का आज क्या हुआ।
युवाओं के रोजगार और भविष्य का मुद्दा उठाया
गहलोत ने कहा कि देश के युवा रोजगार, भविष्य और अपने अधिकारों को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। उनकी आवाज को अराजकता बताना उनकी चिंताओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति के लिए जगह होना जरूरी है। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है। गहलोत के मुताबिक, किसी भी सरकार को सवालों से घबराने के बजाय उनका जवाब देना चाहिए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जवाब मांगा
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों को उठा रहा है, वे केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। गहलोत ने आरोप लगाया कि सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल उठाने वालों पर आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए संबंधित मुद्दों पर तथ्यों के साथ जवाब देना जरूरी है।
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