Ashok Gehlot News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को जयपुर स्थित अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बातचीत में निकाय चुनावों के परिसीमन और पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग हुआ और परिसीमन में गड़बड़ी की गई।

साथ ही, आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों और प्रदेश में सूखे-अकाल के हालात को लेकर भी उन्होंने भजनलाल शर्मा सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने सरकार से जल्द गिरदावरी पूरी कराकर अकाल राहत कार्य शुरू करने की मांग की।

‘चुनाव हारना-जीतना चिंता की बात नहीं’

गहलोत ने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है, लेकिन परिसीमन में कथित गड़बड़ी और पुलिस की कार्रवाई ज्यादा चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि कुछ पुलिस अधिकारी अब कह रहे हैं कि उन पर भारी दबाव था। गहलोत के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही थी और मुख्यमंत्री ने एसपी व कलेक्टर को बुलाकर निर्देश दिए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर गलत बयान देने का आरोप भी लगाया। गहलोत ने कहा कि चुनाव के दौरान हुई घटनाओं से राजस्थान की छवि प्रभावित हुई है।

वार्डों में मतदाताओं की संख्या पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश में परिसीमन के दौरान वार्डों की संख्या और मतदाताओं के बंटवारे में मनमानी की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ वार्डों में 85 मतदाता हैं, जबकि कुछ में 250 और कुछ में 5 हजार, 10 हजार या 20 हजार तक मतदाता हैं। गहलोत ने घनश्याम तिवाड़ी, राजेंद्र राठौड़ और अरुण चतुर्वेदी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने छह महीने तक ओटीएस में बैठकर परिसीमन का काम किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए नुकसानदायक बताया। ये आरोप गहलोत ने मीडिया से बातचीत में लगाए।

पंचायत चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारी

गहलोत ने कहा कि प्रदेश में पंचायत चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। उनके अनुसार, प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संभाग, जिला और विधानसभा स्तर पर कमेटियां बनाई हैं तथा पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों के लिए भी परिसीमन में गड़बड़ी हुई है। गहलोत ने बाड़ेबंदी और नकदी बांटने की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि जनता चुनाव में इसका जवाब देगी। ये बातें उन्होंने राजनीतिक आरोपों के रूप में कहीं।

सूखे और अकाल के हालात पर जताई चिंता

गहलोत ने कहा कि प्रदेश के कई इलाकों में सूखे और अकाल की स्थिति गंभीर है। उन्होंने बीकानेर के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में भी हालात को चिंताजनक बताया। उनका कहना था कि सरकार को समय रहते हालात की निगरानी कर जरूरी कदम उठाने चाहिए। गहलोत ने दावा किया कि दूसरे राज्यों में मुख्यमंत्री सूखे के हालात का जायजा लेने के लिए दौरे कर रहे हैं, जबकि राजस्थान में गांवों की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पशुधन, चारे और पानी के संकट का मुद्दा

गहलोत ने पशुधन पर पड़ रहे असर और चारे की बढ़ती कीमतों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि जैसलमेर में हजारों गायों की मौत हो चुकी है और चारा 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई बांधों में पानी कम है। इससे सिंचाई और पेयजल की समस्या बढ़ सकती है। गहलोत ने सरकार से जल्द गिरदावरी पूरी कराने और अकाल राहत कार्य शुरू करने की मांग की।

‘काम के बदले अनाज’ योजना का किया जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान अकाल प्रबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मदद लेकर ‘काम के बदले अनाज’ योजना शुरू की थी। गहलोत ने मौजूदा सरकार से भी केंद्र के साथ समन्वय कर सूखे से निपटने के लिए कदम उठाने को कहा। उनका कहना था कि केवल घोषणाओं और भाषणों से संकट का समाधान नहीं होगा। सरकार को प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

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