Ashok Gehlot on Nitin Nabin: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने के आरोप के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्ष के आंदोलन को साजिश बताकर लोकतांत्रिक विरोध को बदनाम कर रही है। गहलोत ने चुनाव आयोग, दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों और केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए।

चुनाव आयोग का वकील बनना पड़ रहा

अशोक गहलोत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सवालों से डरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अब चुनाव आयोग का वकील बनना पड़ रहा है। उन्होंने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लोकतंत्र में विश्वास नहीं करने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि विपक्ष का आंदोलन भाजपा के लिए देश को अस्थिर करने की साजिश बन गया है, जबकि विपक्ष में रहते हुए भाजपा भी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करती थी। उन्होंने सवाल किया कि उस समय आंदोलन के पीछे कौन-सी विदेशी ताकत थी और आज किस आधार पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।

नितिन नवीन ने राहुल गांधी और विपक्ष पर क्या आरोप लगाया?

दरअसल, 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन और काक्रोच जनता पार्टी (CJP) पर विदेशी ताकतों के इशारे पर देश को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया था। उन्होंने विपक्षी समूहों की गतिविधियों को देश की स्थिरता के लिए गंभीर बताते हुए उन पर निशाना साधा। गहलोत ने इन्हीं आरोपों के जवाब में भाजपा पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, अपराध नहीं।

दिल्ली में प्रतिबंधों को लेकर गहलोत ने उठाए सवाल

गहलोत ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग जाने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से रोका गया। उन्होंने लोकसभा में राहुल गांधी और राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने का अवसर नहीं दिए जाने का भी दावा किया। उन्होंने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और परिवहन पर लगी पाबंदियों का जिक्र करते हुए कहा कि राजधानी को छावनी में बदल दिया गया है। गहलोत ने 75 ट्रेनों के रद्द होने, 57 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाने और नई दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद होने का दावा किया। हालांकि, दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाओं को लेकर जारी रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन से पहले 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का आदेश दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बंद रखे जाने वाले स्टेशनों की संख्या 45 किए जाने की खबर भी सामने आई। रेलवे ने भी प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली आने-जाने वाली कई ट्रेनों को रद्द किया था।

केंद्र सरकार और भाजपा विदेशी ताकतों के सामने सरेंडर

गहलोत ने केंद्र सरकार और भाजपा पर विदेशी ताकतों के सामने झुकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों, भारत पर लगाए जा रहे टैरिफ और वीजा नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। उन्होंने लिखा कि जब विपक्ष के हर सवाल को अर्बन नक्सल या विदेशी ताकतों से जोड़ दिया जाता है, तो इससे जनता के सवालों का जवाब देने से बचने की कोशिश दिखाई देती है। ये गहलोत के राजनीतिक आरोप हैं।

लोकतांत्रिक विरोध को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन और चुनाव आयोग को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर देश को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है, जबकि गहलोत ने इसे लोकतांत्रिक विरोध को बदनाम करने की कोशिश बताया है। इस विवाद के केंद्र में विपक्ष का प्रदर्शन, चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। भाजपा और विपक्ष इन मुद्दों पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।

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