रंजीत रघुवंशी, अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर में मां अंबे की भक्ति का एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जहां मां का श्रृंगार सोने-चांदी के बेशकीमती आभूषणों से किया गया है। जी हां! मां के श्रृंगार में 44 तोला सोना और करीब साढ़े तीन किलो चांदी का इस्तेमाल किया गया है। सोने का बाजूबंद, चांदी का कलश, रानी हार, मंगलसूत्र, नथ, पायल और चांदी की पादुकाएं…मां के इस दिव्य श्रृंगार को देखने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इस भव्य श्रृंगार की एक और खास बात है। मां के इन बेशकीमती आभूषणों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस का पहरा रहता है।

अशोकनगर के गौशाला रोड स्थित श्री जिंदाबाबा झांकी समिति के दरबार में मां अंबे का स्वरूप इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मां की प्रतिमा को 44 तोला सोने और करीब 3.5 किलो चांदी के आभूषणों से सजाया गया है। आभूषणों से सजा मां का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मां के श्रृंगार में पारंपरिक आभूषणों का विशेष ध्यान रखा गया है। सोने का बाजूबंद, रानी हार, मंगलसूत्र, नथ, कानों के कुंडल और अन्य आभूषण मां की शोभा बढ़ा रहे हैं। वहीं चांदी का कलश, पायल, बिछिया और चरण पादुकाएं इस श्रृंगार को और भी खास बनाती हैं।

24 घंटे पुलिस गार्ड तैनात

मां के दरबार में जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनती है, वहीं दूसरी ओर इन बेशकीमती आभूषणों की सुरक्षा भी बड़ी जिम्मेदारी है। यही वजह है कि झांकी की सुरक्षा के लिए 24 घंटे पुलिस गार्ड तैनात रहता है। समिति के सदस्य भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखते हैं, ताकि श्रद्धालु निर्बाध रूप से मां के दर्शन कर सकें। मां के दरबार की खासियत केवल सोने-चांदी की चमक नहीं, बल्कि इसके पीछे जुड़ी भक्तों की श्रद्धा और समर्पण भी है।

आस्था, परंपरा और भव्यता का अनूठा संगम

भक्तों के लिए मां का प्रत्येक आभूषण आस्था का प्रतीक है। यही विश्वास मां के दरबार को विशेष पहचान देता है। दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु मां के चरणों में शीश झुकाकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। अशोकनगर में मां अंबे का यह दरबार आस्था, परंपरा और भव्यता का अनूठा संगम है। 44 तोला सोने और करीब साढ़े तीन किलो चांदी के आभूषणों से सजा मां का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है। वहीं 24 घंटे सुरक्षा का पहरा इस बात की गवाही देता है कि यहां आस्था के साथ जिम्मेदारी भी पूरी गंभीरता से निभाई जा रही है। मां के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन करने श्रद्धालु लगातार पहुंच रहे हैं।

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