NEW DELHI: दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में आईएचसी किट की कमी से मरीजों की जांच अटकी हुई है। करीब दो महीने से टरकाए जाने के बाद एक महिला को निजी सेंटर में जांच करानी पड़ी। परिजन रमेश ने बताया कि पहले कहा गया था कि यह जांच इंस्टिट्यूट में ही हो जाएगी। गाजियाबाद की रहने वाली 63 वर्षीय महिला को लंग्स की प्रॉब्लम है। डॉक्टरों ने कैंसर की आशंका जताई। कुछ दिन बाद बताया गया कि किट उपलब्ध नहीं है। जांच बाहर से कराने को कहा गया। रमेश का आरोप है कि करीब दो महीने तक उन्हें जांच के नाम पर टरकाया जाता रहा और आखिरकार निजी सेंटर में जांच कराने को मजबूर होना पड़ा। यह सिर्फ एक मामला नहीं। ऐसे सैकड़ों मरीज हैं, जिनकी जांच आईएचसी किट के अभाव में अटकी हुई है।

आईएचसी किट की उपलब्धता आखिर कब होगी ? ये सवाल बार बार उठ रहा है। इस इंस्टिट्यूट में न सिर्फ राजधानी, बल्कि आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि कैंसर शरीर के किस अंग में है और किस स्तर पर है, यह जानने के लिए कई अहम जांचें जरूरी होती हैं। इनमें आईएचसी जांच भी शामिल है, जो टिशू के जरिए की जाती है।

अधिकारियों के अनुसार कई बार दावा किया कि PET स्कैन की सुविधा जल्द शुरू होगी, लेकिन अब तक जांच शुरू नही हो सकी है। कर्मचारियों का कहना है कि बायोप्सी जांच में भी रिपोर्ट हाथ से लिखकर दी जा रही है। तीमारदार इस रिपोर्ट की फोटोकॉपी बाहर से कराने को मजबूर है। अस्पताल कर्मचारियों का कहना है कि पिछले अगस्त से आईएचसी किट का संकट बना हुआ है, जिसकी वजह से जांच अटकी हुई है। कई मरीज महीनों से परेशान है। ट्यूमर मार्कर की जांच भी ठप पड़ी है। यह खून की जांच होती है, लेकिन इसके लिए भी किट उपलब्ध नहीं है। आईएचसी किट के संकट को लेकर अस्पताल के डायरेक्टर से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

करीब चार साल से कैंसर इंस्टिट्यूट में PET स्कैन की जांच नहीं हो रही है। इस वजह से इंस्टिट्यूट के बाहर दलाल सस्ते रेट पर जांच का दावा कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी दिल्ली से बाहर के मरीजों को हो रही है। वे आसानी से दलालों के झांसे में आ जाते हैं।

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