औरंगाबाद। सदर अस्पताल में बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के दौरान अवैध रूप से पैसे वसूलने के गंभीर आरोप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद जिला स्वास्थ्य प्रशासन हरकत में आ गया है। इस वायरल वीडियो का तुरंत संज्ञान लेते हुए जिले के सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने तुरंत अनुशासनात्मक कदम उठाया है। उन्होंने आरोपी एएनएम (ANM) बेबी कुमारी के मासिक वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का कड़ा आदेश जारी किया है। इसके साथ ही उन्हें सदर अस्पताल के प्रतिनियुक्ति स्थल से विरमित (रिलीव) कर उनके मूल पदस्थापन केंद्र भेज दिया गया है।

​सदर अस्पताल से हटाकर मूल केंद्र बिजौली भेजा

​सिविल सर्जन द्वारा जारी आधिकारिक आदेशानुसार, आरोपी स्वास्थ्य कर्मी को सदर अस्पताल से हटाते हुए स्वास्थ्य उपकेंद्र बिजौली (प्रखंड देव) में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। इस पूरी विभागीय कार्रवाई के बाद जिले भर के स्वास्थ्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सिविल सर्जन ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता को कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि मरीजों को सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ पूर्णतः पारदर्शी तरीके से प्रदान करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।

​उपाधीक्षक की जांच रिपोर्ट के बाद गिरी गाज

​घटनाक्रम की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से फैला था, जिसमें टीकाकरण सेवा देने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार से अविलंब स्पष्टीकरण और विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। उपाधीक्षक द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन के आधार पर प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होने पर एएनएम के विरुद्ध यह कार्रवाई की गई। विभाग ने फैसला किया है कि जब तक विभागीय जांच पूरी तरह समाप्त होकर आरोपी कर्मी निर्दोष साबित नहीं हो जातीं, तब तक उनका वेतन स्थगित ही रहेगा।

​स्वास्थ्य सेवाओं में जीरो टॉलरेंस की नीति लागू

​डॉ. कृष्ण कुमार ने प्रेस वार्ता में कड़े शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य विभाग अनियमितताओं पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर दृढ़ता से काम कर रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिले भर के सभी अस्पतालों के उपाधीक्षकों, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं अस्पताल प्रबंधकों को सख्त हिदायत दी गई है। सभी अधिकारियों को अपने-अपने संस्थानों का रोजाना औचक निरीक्षण करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शी निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

​अंतिम रिपोर्ट के आधार पर होगी अगली कार्रवाई

​प्रशासन का कहना है कि टीकाकरण जैसी संवेदनशील एवं निःशुल्क राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। हालांकि, वसूली के आरोपों की अंतिम और वैधानिक पुष्टि विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी, जिसके आधार पर आगे की दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। इस संवाददाता सम्मेलन में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार तथा अस्पताल प्रबंधक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।