Dharm Desk: शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि का पूरे देश में धूमधाम से प्रारंभ हो चुका है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ सुबह से मां दुर्गा के जयकारे गूंजने लगे हैं। नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान के साथ आराधना की जा रही है। इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाले इस पवित्र अनुष्ठान में मां के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना का दौर होगा।
देवी आगमन का शुभ संकेत
हिंदू परंपरा में नवरात्र के पहले दिन यानी वार के हिसाब से माता रानी का वाहन तय होता है। जो भविष्य के संकेत और प्रकृति की स्थिति को दर्शाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार के दिन से हुई है जब रविवार या सोमवार के दिन नवरात्रि का आरंभ होता है तब मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होता है।
माता रानी का हाथी पर सवार होकर आना बहुत शुभ और मंगलकारी संकेत माना जाता है। इसका अर्थ होता है कि आने वाले समय में देश में अच्छी वर्षा होगी खेतों में अनाज की बंपर पैदावार होगी। समाज में सुख-समृद्धि तथा शांति का विस्तार होगा। इसे कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए ही बहुत ही सकारात्मक माना जा रहा है। जिससे किसानों और आम जनजीवन में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
नौ दिनों तक चलेगी मां के स्वरूपों की आराधना
- पहले दिन मां शैलपुत्री
- दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी
- तीसरे दिन मां चंद्रघंटा
- चौथे दिन मां कूष्मांडा
- पांचवें दिन मां स्कंदमाता
- छठे दिन मां कात्यायनी
- सातवें दिन मां कालरात्रि
- आठवें दिन मां महागौरी
- नवें दिन मां सिद्धिदात्री
घटस्थापना का मुहूर्त और पंचांग
प्रतिपदा तिथि: 10 अक्टूबर रात 9:19 बजे से 11 अक्टूबर रात 9:30 बजे तक
अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
चित्रा नक्षत्र: 10 अक्टूबर रात 9:42 बजे से 11 अक्टूबर रात 10:32 बजे तक
वैधृति योग: 10 अक्टूबर रात 10:02 बजे से 11 अक्टूबर रात 9:05 बजे तक
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