इन्द्रपाल सिंह, इटारसी। इटारसी के लेखक और शोधार्थी मिलिंद रोंघे ने आयोग को लिखे पत्र में लिखा है, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से साल 1986-87 से उर्दू साहित्य के क्षेत्र में आजीवन सृजन के लिए हर साल सर डॉक्टर मोहम्मद अल्लामा इकबाल स्मृति सम्मान दिया जाता है। जबकि पाकिस्तान में उन्हें पाकिस्तान के आध्यात्मिक संस्थापक के रूप में जाना जाता है। नर्मदापुरम इटारसी के लेखक और शोधार्थी मिलिंद रोंघे ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग को पत्र लिखकर इस मामले में संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

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दरअसल, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भोपाल के पुराने मैदान का नाम अल्लामा इकबाल के नाम पर होने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बाद नर्मदापुरम के लेखक और शोधार्थी मिलिंद रोंघे ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष को पत्र लिखकर सम्मान पर संज्ञान लेने को लेकर पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि अल्लामा इकबाल प्रजातंत्र विरोधी, हिंसा का संदेश देने वाले इस्लामी कवि हैं। 

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आयोग को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि इकबाल आजीवन मुस्लिम लीग के सदस्य रहे हैं और मोहम्मद अली जिन्ना ने भी उन्हें आध्यात्मिक गुरु बताया था। इसके अलावा डॉक्टर अंबेडकर और कवि रामधारी सिंह दिनकर का संदर्भ करते हुए मिलिंद रोंघे ने पत्र में इकबाल मैदान की तरह इकबाल सम्मान पर भी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

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