Kalpakkam Nuclear Power Plant: भारत ने अपने सिविल न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम में माइलस्टोन उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु स्थित कलपक्कम न्यूक्लियर पावर प्लांट में ऑटोमैटिक न्यूक्लियर चेन रिएक्शन (spontaneous nuclear chain reaction) शुरू हो गया है। 6 अप्रैल को कलपक्कम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली। भारत ने इस उपलब्धि के साथ ही होमी जहांगीर भाभा (Homi J. Bhabha) के सपने को भी साकार कर दिखाया। न्यूक्लियर पावर प्लांट में ऑटोमैटिक न्यूक्लियर चेन रिएक्शन का सपना होमी जहांगीर भाभा ने 1950 के दशक में देखा था। भाभा ने ऐसा प्रोग्राम बनाया जो थोरियम का इस्तेमाल करके देश को लंबे समय तक सस्ती और साफ ऊर्जा दे सके। अब पीएम मोदी के शासनकाल में भारतीय इंजिनियरों ने ये कमाल कर दिखाया है।

रूस के बाद अब भारत दूसरा देश बन गया है जहां ऑटोमोड में न्यूक्लियर चेन रिएक्शन शुरू हो गया है। यह देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाएगी। साथ ही 2070 के नेट-जीरो लक्ष्य की ओर बड़ा कदम है।

कलपक्कम, तमिलनाडु में बना 500 मेगावाट का यह प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की न्यूक्लियर कंपनी भाविनी (भाभा न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स) ने बनाया है। यह रिएक्टर प्लूटोनियम-यूरेनियम मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल करता है. इसमें कूलेंट के रूप में तरल सोडियम का उपयोग होता है। सामान्य न्यूक्लियर रिएक्टर ईंधन जलाते हैं लेकिन फास्ट ब्रीडर रिएक्टर उनसे ज्यादा ईंधन पैदा करता है। यानी यह जितना ईंधन खर्च करता है उससे ज्यादा नया फिसाइल मटेरियल तैयार करता है, जो चेन रिएक्शन चला सके।

क्रिटिकलिटी हासिल होने का मतलब है कि अब चेन रिएक्शन खुद-ब-खुद चलने लगा है। रिएक्टर ऊर्जा पैदा करने के साथ भविष्य के लिए भी ईंधन स्टोर कर रहा है। यह टेक्नोलॉजी बहुत जटिल है क्योंकि तरल सोडियम को 550 डिग्री तक गर्म रखना पड़ता है। कोई भी छोटी गलती पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है।

तीन स्टेज का प्रोग्राम क्यों शुरू किया गया

  • पहला: प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) जो उपलब्ध यूरेनियम से बिजली बनाता है।
  • दूसरा: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का है जो प्लूटोनियम बनाता है. थोरियम को U-233 में बदलता है।
  • तीसरा: थोरियम बेस्ड रिएक्टर का होगा जो भारत के विशाल थोरियम भंडार का पूरा फायदा उठाएगा।

भारत को एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भारत के पास यूरेनियम बहुत कम है लेकिन थोरियम दुनिया में सबसे ज्यादा है। इसलिए यह कार्यक्रम भारत को एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बनाया गया था। अब PFBR की क्रिटिकलिटी दूसरे स्टेज को मजबूत कर रही है. इससे भविष्य में थोरियम का इस्तेमाल आसान हो जाएगा।  यह उपलब्धि सिर्फ एक रिएक्टर चलाने की बात नहीं है. यह भारत को फास्ट रिएक्टर टेक्नोलॉजी में रूस के बाद दूसरा देश बना देती है। दुनिया के बाकी देशों में यह टेक्नोलॉजी बहुत कम देशों के पास है। इससे भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता बढ़ेगी। साथ ही 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

कम कचरा पैदा करता है फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कम कचरा पैदा करता है।। मौजूदा यूरेनियम और प्लूटोनियम का बेहतर उपयोग करता है। इससे बिजली सस्ती होगी. देश ऊर्जा सुरक्षा के मामले में मजबूत बनेगा। कलपक्कम का रिएक्टर पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा। भविष्य में और ज्यादा ऐसे रिएक्टर बनाए जा सकेंगे जो थोरियम का इस्तेमाल करके बिजली बनाएं।

2004 से शुरू हुआ सफर: देरी और चुनौतियां

यह रिएक्टर 2004 में शुरू हुआ था लेकिन कई तकनीकी चुनौतियों, देरी और लागत बढ़ने के कारण यह अब जाकर क्रिटिकल हुआ है। तरल सोडियम को संभालना. सुरक्षा मानक पूरा करना. बहुत सारे टेस्ट करना आसान काम नहीं था। फिर भी भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसे पूरा किया।

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