लखनऊ. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. रामपुर जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद उन्हें एक बार फिर जेल जाना पड़ा. जौहर ट्रस्ट और मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था. उन्हें डासना जेल में रखा गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब शत्रु संपत्ति पर कब्जे और ट्रस्ट से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है.
दिवाली के बाद ED करेगी पूछताछ
आजम खान के खिलाफ शत्रु संपत्ति पर कब्जे से जुड़े मामले को भी ED ने अपनी जांच में शामिल किया है. बताया जा रहा है कि दिवाली के बाद उनसे पूछताछ की जाएगी. इस दौरान शत्रु संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं. जांच पूरी होने के बाद ED अदालत में चार्जशीट दाखिल कर सकती है. ऐसे में माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले उनकी रिहाई मुश्किल है.
जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन कब्जाने का आरोप
आजम खान पर रामपुर के सिंघनखेड़ा गांव और आसपास की करीब 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने का आरोप है. यह जमीन मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण से जुड़ी बताई जाती है. शत्रु संपत्ति उस संपत्ति को कहते हैं, जिसके मालिक देश छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए हों.
राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की जांच
जांच एजेंसियों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के लिए जमीन हासिल करने में सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई. दस्तावेजों से पन्ने हटाने और फर्जी नाम दर्ज करने के आरोप भी हैं. मई 2020 में रामपुर के जिलाधिकारी कार्यालय के सहायक अभिलेखपाल की शिकायत पर कई FIR दर्ज की गई थीं. इन मामलों में आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को भी आरोपी बनाया गया.
जौहर ट्रस्ट के सदस्यों पर भी नजर
ED ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी करीब 1,170 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं. एजेंसी ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भूमिका भी जांच रही है. 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में दर्ज FIR में जौहर ट्रस्ट को शामिल किया गया था. आजम खान ने 1990 में इस ट्रस्ट की स्थापना की थी. उनकी पत्नी तंजीन फातिमा सचिव, बहन निकहत अफलाक कोषाध्यक्ष और दोनों बेटे सदस्य बनाए गए थे. ट्रस्ट के नौ सदस्यों में पांच आजम खान के परिवार से हैं.

