लखनऊ की CBI कोर्ट ने 6 नवंबर को कोलकाता के होटल लिंगटन के मालिक के अपहरण मामले में बबलू श्रीवास्तव को बरी कर दिया. अभियोजन पक्ष जेल में रहते हुए अपहरण की साजिश रचने का आरोप साबित नहीं कर सका.
लखनऊ. अंडरवर्ल्ड डॉन ओम प्रकाश उर्फ बबलू श्रीवास्तव को करीब 20 साल पुराने अपहरण के मामले में कानूनी राहत मिली है. 6 नवंबर को लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने कोलकाता के होटल लिंगटन के मालिक के अपहरण की साजिश से जुड़े इस मामले में उन्हें बरी कर दिया.
अभियोजन पक्ष नहीं दे सका सबूत
अधिवक्ता वीर सिंह के मुताबिक, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि बबलू श्रीवास्तव ने जेल में रहते हुए अपहरण की योजना बनाई थी या अपने गिरोह के सदस्यों के जरिए इस वारदात को अंजाम दिलाया था. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जिशान अल्वी ने अदालत में पैरवी की. इसके बाद कोर्ट ने उन्हें मामले में बरी करने का फैसला सुनाया.
कस्टम अधिकारी की हत्या में उम्रकैद
बबलू श्रीवास्तव को एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है. 24 मार्च 1993 को प्रयागराज में कस्टम कलेक्टर एलडी अरोड़ा की उनके घर के पास हत्या कर दी गई थी. इस वारदात में बबलू श्रीवास्तव और उसके गुर्गों की संलिप्तता के मामले में उन पर टाडा लगाया गया था.
30 सितंबर 2008 को कानपुर नगर स्थित टाडा कोर्ट ने बबलू श्रीवास्तव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद 25 जनवरी 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था.
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 10 फरवरी 2022 तक बबलू श्रीवास्तव 26 वर्ष 9 माह 20 दिन की अपरिहार सजा और 31 वर्ष 3 माह 3 दिन की सपरिहार सजा काट चुका था.

