पटना। ​बाढ़ स्थित प्रसिद्ध उमानाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों ने अब विवाद का रूप ले लिया है। प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर के निकट स्थित घरों को खाली कराने के आदेश के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। अंचलाधिकारी (CO) डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह की कार्रवाई को लोगों ने ‘मनमानी’ करार दिया है।

​बिना नोटिस के जमाबंदी रद्द करने का दावा

​प्रशासनिक निर्देश के अनुसार, मंदिर के आसपास के लगभग 42 घरों को खाली करने को कहा गया है। अंचलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्पष्ट किया कि कई प्लॉटों की जमाबंदी रद्द कर दी गई है, इसलिए शुक्रवार तक घर खाली कर दिए जाएं। हालांकि, स्थानीय निवासी मनोज कुमार का आरोप है कि उन्हें जमाबंदी रद्द होने की कोई आधिकारिक सूचना पहले नहीं दी गई थी।

​पुनर्वास की मांग और आजीविका का संकट

​पीढ़ियों से वहां रह रहे लोगों के सामने अब छत और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासी मीरा देवी, जो तीन पीढ़ियों से वहां रह रही थीं, अब अपना घर टूटने के बाद पॉलिथीन के नीचे रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि दुकान देने के नाम पर उनसे हस्ताक्षर तो कराए गए, लेकिन अब भविष्य अंधकारमय लग रहा है। वहीं, विक्की कुमार जैसे युवाओं का कहना है कि घर टूटने के बाद सड़क किनारे दुकान लगाने पर भी नगर परिषद जुर्माना वसूल रही है।

​मामला कोर्ट में फिर भी कार्रवाई

​उमानाथ मंदिर के महंत जयमंगल भारती ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन के कागजात और रसीदें उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने दावा किया कि मामला पटना डीएम के पास लंबित है और फैसला सुरक्षित रखा गया था, फिर भी आनन-फानन में जमाबंदी रद्द कर दी गई। विरोध करने पर उन्हें जेल भेजने की धमकी भी दी गई है।
​अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।