जगदलपुर। केशकाल में पुलिस ने गांजा तस्करी के बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए राजस्थान के एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से 407 किलो 910 ग्राम गांजा बरामद किया गया है, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ 3 लाख 95 हजार 500 रुपये है। 3 नवंबर को मुखबिर से मिली सूचना के बाद पुलिस ने सिल्वर महिंद्रा एक्सयूवी-500 को रोककर तलाशी ली। कार की तलाशी में भूरे रंग के सेलोटेप से पैक किए गए 78 पैकेट गांजा मिले। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल ओडिशा नंबर की एक्सयूवी-500 भी जब्त की है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान दीपक कुमार माली उम्र 31 वर्ष, निवासी प्रतापगढ़ राजस्थान के रूप में हुई है। कार्रवाई में गांजा, वाहन, मोबाइल और नकदी समेत कुल 2 करोड़ 18 लाख 96 हजार 600 रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। यानी तस्करी में राजस्थान का आरोपी और ओडिशा में पंजीकृत वाहन इस्तेमाल किया जा रहा था। केशकाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ख) के तहत मामला दर्ज किया है। न्यायालय में पेशी के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

त्योहार की खरीदारी पर ट्रैफिक का ग्रहण

बस्तर। जगदलपुर में दीपावली की खरीदारी के लिए बाजार तो सज गया है, लेकिन ग्राहकों को खरीदारी से ज्यादा ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। शहर के गोल बाजार और एमएलबी रोड में त्योहारी भीड़ के बीच यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। संकरी सड़कों पर दुकानदारों का सामान फुटपाथ से आगे तक फैला हुआ है, तो दूसरी ओर सड़क किनारे वाहनों की कतार लग रही है। नतीजा यह है कि लोगों को बाजार के भीतर आवाजाही करने में भी परेशानी हो रही है। सबसे ज्यादा दबाव एमएलबी रोड पर देखने को मिल रहा है, जहां दुकानों के बाहर सामान और ग्राहकों के वाहन रास्ता घेर रहे हैं। यातायात विभाग ने पीली पट्टी के भीतर वाहन खड़े करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन होता नजर नहीं आ रहा। हर साल दीपावली, होली और रक्षाबंधन पर बाजार में भीड़ बढ़ती है, लेकिन स्थायी यातायात योजना अब तक नजर नहीं आती। लोगों का कहना है कि त्योहारी बाजार को पुरानी मंडी में शिफ्ट करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और व्यापारी संगठनों के बीच इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। अब सवाल यह है कि त्योहारी बाजार में ग्राहकों को सुविधा देने के लिए व्यवस्था कब सुधरेगी या हर पर्व पर यही जाम लोगों की मजबूरी बना रहेगा।

बाफना लाइफ स्टाइल की छत पर युवती की मौत

बस्तर। जगदलपुर के बाफना लाइफ स्टाइल की छत पर 21 वर्षीय दीपा सागर का शव मिलने के मामले में मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। मामले में अब सबसे अहम कड़ी घटनास्थल से मिला सुसाइड नोट माना जा रहा है। पुलिस इस नोट की लिखावट का परीक्षण कराकर उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने में जुटी है। इसके साथ ही पोस्टमार्टम की शॉर्ट रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की वजह स्पष्ट हो सके।

जानकारी के मुताबिक, दीपा 1 नवंबर को रोजाना की तरह दुकान पहुंची थी। शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच वह अचानक लापता हो गई। अगले दिन सफाई कर्मचारी ने दुकान की छत पर उसका शव देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
मौके पर कोतवाली पुलिस और एफएसएल टीम ने पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया था। डिमरापाल में पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने मर्ग क्रमांक 70/26 कायम कर जांच शुरू की है। फिलहाल पुलिस सुसाइड नोट, हैंडराइटिंग परीक्षण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

कंप्यूटर डिप्लोमा लेकर भी नौकरी से बाहर, संस्था की मान्यता पर उठे सवाल

नारायणपुर। नारायणपुर में कंप्यूटर शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के सामने अब डिप्लोमा की मान्यता का संकट खड़ा हो गया है। मां कंप्यूटर संस्था से डीसीए और पीजीडीसीए करने वाले कुछ अभ्यर्थी पंचायत सचिव भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन के दौरान अपात्र घोषित कर दिए गए हैं। युवाओं ने हजारों रुपये फीस देकर इस उम्मीद में कोर्स किया था कि प्रमाणपत्र सरकारी नौकरियों में उनके काम आएगा। विद्यार्थियों का आरोप है कि प्रवेश के समय संस्था ने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय का प्रमाणपत्र देने का भरोसा दिलाया था। लेकिन पंचायत सचिव भर्ती 2026-27 में दस्तावेजों की दोबारा जांच के दौरान उनके प्रमाणपत्रों की मान्यता पर आपत्ति जताई गई।

जिला पंचायत के पत्र में प्रमाणपत्र को मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय का नहीं होने संबंधी सवाल उठाया गया है। पीड़ित अभ्यर्थियों का यह भी आरोप है कि मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय का प्रमाणपत्र मांगने पर उनसे अतिरिक्त रकम मांगी गई। पार्षद विजय सलाम ने संस्था की संबद्धता और डीसीए-पीजीडीसीए पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से संस्था की वैधानिक मान्यता, प्रमाणपत्रों और विद्यार्थियों से ली गई फीस की जांच कराने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रमाणपत्र भर्ती में मान्य नहीं हैं, तो विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी फीस की जिम्मेदारी कौन लेगा। फिलहाल आरोपों की निष्पक्ष जांच और संस्था का पक्ष सामने आना जरूरी है।

बांसकोट में बैंक की शर्तों से सरकारी योजनाओं पर ब्रेक

कोंडागांव। बड़ेराजपुर ब्लॉक के बांसकोट में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने पहुंचे ग्रामीणों को बैंक की शर्तों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हितग्राहियों का आरोप है कि पीएम आवास और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लिए फाइनेंस कराने पहुंचने पर उनसे खाते में पहले से बड़ी रकम जमा रखने को कहा जा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बांसकोट शाखा में फाइनेंस राशि के बराबर बचत खाते में रकम होने की शर्त रखी जा रही है। कुछ हितग्राहियों ने कम से कम दो लाख रुपये खाते में जमा होने की बात कहे जाने का आरोप लगाया है। उनका सवाल है कि यदि उनके पास इतनी रकम होती, तो वे सरकारी योजना के तहत बैंक से फाइनेंस कराने क्यों पहुंचते? हितग्राहियों ने एफिडेविट, चेकबुक और हस्ताक्षर से जुड़ी अतिरिक्त औपचारिकताएं मांगे जाने की भी शिकायत की है।

रूप सुदन, शालिकराम, परदेसी चक्रधारी, संजूलाल साहू, गीता साहू और जयलाल मरकाम सहित अन्य ग्रामीणों ने अपनी परेशानी बताई है। वहीं बैंक प्रबंधक सूर्यकांत त्रिपाठी का कहना है कि वे नियमों और ऊपर से मिले निर्देशों के अनुसार काम कर रहे हैं। उन्होंने असंतुष्ट हितग्राहियों को कलेक्टर जनदर्शन या संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत करने की बात कही है। अब सवाल यह है कि सरकारी योजनाओं में बैंक फाइनेंस की शर्तें जरूरतमंदों की मदद कर रही हैं या उनके लिए एक नई बाधा बन रही हैं।

खाद कारोबारियों पर प्रशासन का शिकंजा, छह प्रतिष्ठानों पर जुर्माना

बस्तर। जिले में खाद और बीज कारोबार में नियमों की अनदेखी करने वाले व्यापारियों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है।
किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए चलाए गए जांच अभियान में कई अनियमितताएं सामने आई थीं। कृषि विभाग की टीम ने अलग-अलग विक्रय केंद्रों और प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 60 से अधिक प्रकरण दर्ज किए थे।

इन मामलों को कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां सुनवाई के बाद छह कारोबारियों पर आर्थिक दंड लगाया गया।
कलेक्टर आकाश छिकारा ने कुल 7 लाख 78 हजार 460 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें करपावंड के गुप्ता कृषि केंद्र पर 3 लाख और बालगोपाल केंद्र पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। परचनपाल के समृद्धि किसान सेवा केंद्र और जगदलपुर आमागुड़ा के महालक्ष्मी कृषि केंद्र पर एक-एक लाख रुपये का दंड लगाया गया है।

वहीं इच्छापुर के पिंटू कृषि केंद्र पर 75 हजार और लोहण्डीगुड़ा के रिंकू कृषि केंद्र पर 3 हजार 460 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में विक्रय प्रतिबंध, निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी और अनधिकृत परिसर में भंडारण जैसी गड़बड़ियां सामने आई थीं। प्रशासन ने साफ किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

छिंदगढ़ में एनएच-30 पर शराब तस्करी का खुलासा

सुकमा। जिले के छिंदगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर पुलिस की नाकेबंदी ने शराब तस्करी की कोशिश नाकाम कर दी। पुलिस ने मारुति ईको वाहन से अंग्रेजी शराब और बीयर की 48.740 बल्क लीटर खेप बरामद की है। जब्त शराब की अनुमानित कीमत 23 हजार 680 रुपये बताई गई है। मुखबिर से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने छिंदगढ़ क्षेत्र में वाहनों की जांच शुरू की थी। इसी दौरान आंध्रप्रदेश नंबर की मारुति ईको क्रमांक एपी-39-डब्ल्यूपी-5611 को रोककर तलाशी ली गई। वाहन में बोरियों और झोलों के भीतर छिपाकर शराब रखी गई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी सुकमा से छिंदगढ़ की ओर शराब लेकर जा रहा था और उसके पास परिवहन या बिक्री से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शेख चिन्ना उम्र 26 वर्ष, निवासी जग्गम पालेम, जिला ईस्ट गोदावरी, आंध्रप्रदेश के रूप में हुई है। वह वर्तमान में छिंदगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम रोकेल में रह रहा था। पुलिस ने शराब और परिवहन में इस्तेमाल वाहन जब्त कर आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है।

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