Bastar News Update : सुकमा. संघर्ष और चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले सुकमा जिले से अब बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है. वनांचलों के पोटाकेबिन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा दी जा रही है. यह पहल केवल तकनीकी ज्ञान नहीं, बल्कि भय और पिछड़ेपन के साए में पले बच्चों के लिए नई उम्मीद है. अब ये स्कूल आधुनिक तकनीक के केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं. बच्चे कोडिंग, डेटा विश्लेषण और नवाचार से रूबरू हो रहे हैं. कृषि और मौसम से जुड़े स्थानीय मुद्दों पर डिजिटल मॉडल तैयार किए जा रहे हैं. जिला प्रशासन ने लाइवलीहुड कॉलेज में शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया. शिक्षकों को एआई, डिजिटल कंटेंट और प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई सिखाई जा रही है. डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट एप्स से पढ़ाई को रोचक बनाया जा रहा है. वैनिक सेरो संस्था के प्रशिक्षक बच्चों में तकनीक का डर खत्म करने पर काम कर रहे हैं. यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सोच का बड़ा बदलाव दर्शाती है. अब सुकमा में बंदूकों की नहीं, तकनीक की भाषा गूंजने लगी है.

ब्लू गुफा: जंगल के भीतर छुपा प्राकृतिक चमत्कार

जगदलपुर. दरभा ब्लॉक क्षेत्र में ग्रामीणों ने एक अनाम गुफा का मुहाना खोजा है. तोयनार के पास मिली इस गुफा को ‘ब्लू गुफा’ नाम दिया गया है. 25 फरवरी से इसे लोगों को दिखाने की तैयारी की जा रही है. गुफा जंगल के भीतर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित है. वहां तक पहुंचने के लिए पगडंडी बनाई जा रही है. बारिश और मिट्टी से ढका मुहाना ग्रामीणों ने साफ किया. अब तक सौ मीटर अंदर तक सफाई हो चुकी है. नीले पत्थरों की संरचना इसकी खास पहचान है. यह जैव विविधता का दुर्लभ उदाहरण मानी जा रही है. पर्यावरण विशेषज्ञ नियंत्रित प्रवेश की सलाह दे रहे हैं. गुफा का वैज्ञानिक और प्राकृतिक महत्व भी खास है. संतुलित पर्यटन से यह क्षेत्र नई पहचान पा सकता है.

मधुमक्खियों का हमला: शरारत ने राहगीरों की जान डाली संकट में

जगदलपुर. लोहंडीगुड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम टाकररागुड़ा में लापरवाही भारी पड़ गई. असामाजिक तत्वों ने सड़क किनारे मधुमक्खी के छत्ते पर पत्थर मार दिया..इसके बाद उग्र मधुमक्खियों ने राहगीरों पर हमला कर दिया. घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. बाइक से गुजर रहे लछिंधर नाग और संजय नाग हमले में घायल हो गए. दोनों घरेलू सामान खरीदने निकले थे. मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक चारों ओर से घेर लिया. अन्य राहगीरों को भी अपनी जान बचाने के लिए जमीन पर लेटना पड़ा. कई लोगों ने वाहन छोड़कर भागकर शरण ली. घटना ने सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ग्रामीणों ने ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है..प्रशासन से क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाने की अपील की गई है.

30 साल का इंतज़ार : सरपंच ने जुगाड़ से बनाई स्कूल की बाउंड्री

तोकापाल. तोकापाल ब्लॉक के मुसरीगुड़ा प्राथमिक स्कूल की स्थिति प्रशासनिक उदासीनता उजागर करती है. ब्लॉक मुख्यालय से महज दो किलोमीटर दूर स्कूल आज भी बाउंड्रीवाल से वंचित है. तीन दशकों से ग्रामीण और स्कूल प्रबंधन मांग करते रहे. लेकिन फाइलें दफ्तरों से बाहर नहीं निकल सकीं. आखिरकार सरपंच अमित भंडारी ने स्थानीय संसाधनों से अस्थायी बाउंड्री बनवाई. स्कूल के पास से मुख्य सड़क गुजरती है. तेज रफ्तार वाहनों से बच्चों को हमेशा खतरा बना रहता था. बाउंड्री न होने से आवारा कुत्ते भी परिसर में घुस जाते थे. खेलते-खेलते बच्चे सड़क तक पहुंच जाते थे. सरपंच का कदम सराहनीय है, लेकिन सवाल भी खड़े करता है. क्या बुनियादी सुरक्षा के लिए पंचायतों को ही आगे आना होगा? ग्रामीणों ने स्थायी पक्की बाउंड्री की मांग दोहराई है.

डीएमएफ बोर खनन: करोड़ों खर्च, किसानों को नहीं मिला पानी

कोंटा. डीएमएफ मद से कराए गए बोर खनन में बड़ी लापरवाही सामने आई है. साल 2023-24 में 178 आदिवासी किसानों के खेतों में बोर खुदवाए गए. इस पर तीन करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. विभाग का दावा है कि 60 किसानों को सिंचाई का लाभ मिला. लेकिन लाभार्थियों की लिखित सूची उपलब्ध नहीं कराई गई. जानकारी केवल मौखिक बताई जा रही है. किसानों से पंप और पाइप के नाम पर अंश राशि भी ली गई. इसके बावजूद सिंचाई शुरू नहीं हो सकी. अब तक बोरों का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ. एक ही ठेकेदार से सभी बोर खुदवाने पर सवाल उठे हैं. मुरलीगुड़ा में जमीन और बोर के नाम अलग-अलग पाए गए. किसानों ने भ्रष्टाचार की जांच की मांग की है.

कागज कारखाना ठंडे बस्ते में, बस्तर के संसाधनों का बाहर फायदा

बीजापुर. बीजापुर जिले में प्रस्तावित कागज कारखाने की योजना ठप पड़ी है. भोपालपटनम क्षेत्र को बांस उत्पादन के कारण चुना गया था. लेकिन बांस महाराष्ट्र भेजा जा रहा है. किसानों की नीलगिरी भी ओडिशा ले जाई जा रही है. स्थानीय स्तर पर उद्योग न होने से किसानों को कम दाम मिल रहे हैं. क्लोन नीलगिरी पौधे वर्षों से वितरित किए जा रहे हैं. अब पेड़ तैयार हैं, लेकिन कीमत दो-तीन रुपये किलो ही मिल रही है. ओडिशा के व्यापारी सीधे किसानों से खरीदी कर रहे हैं. यदि कारखाना बस्तर में होता तो किसानों को बेहतर लाभ मिलता. नक्सल समस्या घटने से बांस कटाई बढ़ने की संभावना है. लेकिन इसका फायदा फिलहाल बाहर के राज्यों को होगा. किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.

इंद्रावती एनीकट विवाद: पर्यटन के नाम पर किसानों की अनदेखी

जगदलपुर. इंद्रावती नदी बाजार संघर्ष समिति ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एनीकट का गेट बिना सूचना खोले जाने से जलस्तर गिर रहा है. किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर संकट खड़ा हो गया है. आरोप है कि यह कदम पर्यटन आयोजन को ध्यान में रखकर उठाया गया. वीआईपी और जलप्रपात की छवि प्राथमिकता में रही. किसानों को पूर्व सूचना नहीं दी गई. पिछले वर्ष भी इसी तरह पानी छोड़ा गया था. तब कई गांवों की फसल प्रभावित हुई थी. संघर्ष समिति ने लिखित सूचना की व्यवस्था की मांग की. किसानों की जीविका पूरी तरह नदी पर निर्भर है. अचानक जलस्तर गिरने से धान की फसल पर असर पड़ता है. मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है.