Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर दशहरा की भव्यता बरकरार रखने के साथ आयोजन का आर्थिक बोझ कम करने की कवायद शुरू हो गई है. जगदलपुर के राजमहल सभागार में सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप की अध्यक्षता में सर्व समाज की बैठक हुई. बैठक में करीब 200 समाज पदाधिकारियों ने शामिल होकर महापर्व के आयोजन, खर्च और व्यवस्थाओं पर अपने सुझाव रखे. सर्व समाज ने NMDC से हर साल एक करोड़ रुपये देने की मांग उठाई. बैठक में तर्क दिया गया कि NMDC बस्तर के लौह अयस्क से हर साल हजारों करोड़ रुपये का कारोबार करती है, इसलिए क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उसकी भागीदारी भी बढ़नी चाहिए. समिति के मुताबिक, बस्तर दशहरा के आयोजन पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि NMDC से 50 लाख और संस्कृति विभाग से 25 लाख रुपये मिलते हैं. आयोजन में करीब 10 हजार लोगों की भागीदारी का हवाला देते हुए सभी समाजों से आर्थिक और सामाजिक सहयोग की अपील की गई. दूरस्थ गांवों से आने वाले ग्रामीणों के ठहरने के लिए समाजों के धर्मशाला और भवन उपलब्ध कराने का सुझाव भी सामने आया. वहीं, हालिया बाढ़ से किसानों की फसल बर्बाद होने और मकानों को नुकसान पहुंचने के मद्देनजर दशहरा सादगी से मनाने तथा अनावश्यक खर्च रोकने पर जोर दिया गया. पूर्व विधायक राजाराम तोड़ेम समेत विभिन्न समाज प्रमुखों ने आयोजन को सरकारी उत्सव के बजाय पूरे बस्तर का साझा महापर्व बताते हुए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की.
आठ साल बाद केशकाल घाट में फोरलेन बाईपास का काम शुरू
कोंडागांव. बस्तर की लाइफलाइन माने जाने वाले नेशनल हाईवे-30 पर केशकाल घाट में यातायात की परेशानी दूर करने की उम्मीद फिर जगी है. करीब 266 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित 11.38 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाईपास का निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है. आठ साल से अटकी इस परियोजना के शुरू होने से घाट में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है. स्थानीय स्तर पर रोजाना हजारों यात्रियों और वाहन चालकों को इस मार्ग पर जाम के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है. परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लंबे समय से नई दिल्ली की स्क्रीनिंग कमेटी की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा था. जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2018 में बाईपास निर्माण का ठेका मुंबई की वालेचा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था. कंपनी ने आगे निर्माण कार्य दूसरी एजेंसी को सौंपा, लेकिन शुरुआती अर्थवर्क के बाद काम बंद हो गया और परियोजना अधूरी रह गई. बताया गया कि पहले करीब ढाई किलोमीटर तक मिट्टी का काम हुआ था, जिसके बाद निर्माण की रफ्तार थम गई. अब मंजूरी मिलने के बाद घाट के निचले हिस्से से दोबारा काम शुरू किया गया है. परियोजना में दो बड़े और सात मध्यम पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है. अब सबसे बड़ी चुनौती तय समय में निर्माण पूरा करने की है, ताकि वर्षों से जाम झेल रहे यात्रियों को वास्तविक राहत मिल सके.
मां दंतेश्वरी के दरबार तक पदयात्रा, भानपुरी-लोहण्डिगुड़ा मार्ग पर बढ़ी आवाजाही
जगदलपुर. शारदीय नवरात्र के साथ बस्तर अंचल में मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की पदयात्रा का सिलसिला तेज हो गया है. दंतेवाड़ा स्थित शक्तिपीठ तक पहुंचने के लिए ग्रामीण भानपुरी और लोहण्डिगुड़ा मार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं. कोंडागांव और नारायणपुर जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी रास्ते से पैदल यात्रा करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. हाथों में पूजा सामग्री और जुबां पर माता के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं के जत्थे मार्ग पर नजर आ रहे हैं. नवरात्र के दौरान ग्रामीण परिवारों और समूहों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. भानपुरी-लोहण्डिगुड़ा मार्ग से दंतेवाड़ा पहुंचना अपेक्षाकृत सुविधाजनक होने के कारण यह रास्ता पदयात्रियों के लिए अहम बना हुआ है. धार्मिक आस्था के साथ यह यात्रा बस्तर के अलग-अलग इलाकों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की तस्वीर भी पेश कर रही है. कई श्रद्धालु समूह में आगे बढ़ते हुए रास्ते में विश्राम कर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं. नवरात्र के चलते मार्ग पर पदयात्रियों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय स्तर पर भी धार्मिक माहौल बना हुआ है. श्रद्धालुओं की इस यात्रा के बीच सुरक्षित आवागमन और रास्ते में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है.
बचेली में सड़क बनी निजी गैरेज, शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
दंतेवाड़ा. लौह नगरी बचेली में सड़क पर कब्जे और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. शहर में एक बाइक रिपेयरिंग दुकान के सामने सड़क के बड़े हिस्से पर ही वाहनों की मरम्मत किए जाने की स्थिति सामने आई है. वहीं, सड़क के दूसरे किनारे दोपहिया वाहन खड़े होने से आवागमन के लिए उपलब्ध जगह और कम हो रही है. इसका खामियाजा राहगीरों और वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की जा चुकी है. शिकायत के बाद जांच होने की बात सामने आई, लेकिन मौके पर हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में शिकायतों के निराकरण और जमीनी कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं. नगरपालिका, पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अमले की जिम्मेदारी पर भी चर्चा हो रही है. नगरपालिका में नेता प्रतिपक्ष मनोज साह का आरोप है कि मुख्य मार्ग की समस्या जस की तस बनी हुई है और शिकायत का निराकरण केवल कागजों में हो रहा है. स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क पर अतिक्रमण और नियम विरुद्ध पार्किंग की जांच कर ठोस कार्रवाई की जाए. अब देखना होगा कि संबंधित विभाग सड़क को आम लोगों के लिए सुगम बनाने की दिशा में कब कदम उठाते हैं.
पोलावरम डूबान की आशंका के बीच आदिवासी अधिकारों पर लामबंदी
सुकमा. जिले के अंदरूनी इलाकों में आदिवासी अधिकारों, जमीन और संभावित विस्थापन का मुद्दा अब जनसभाओं में प्रमुखता से उठने लगा है. कोंटा ब्लॉक के बुर्कालंका में बस्तरिया राज मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित आमसभा में आठ पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए. सभा में वन अधिकार कानून, ग्रामसभा की शक्तियों और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा को लेकर चर्चा की गई. पोलावरम परियोजना से संभावित डूबान की आशंका ने ग्रामीणों के बीच जमीन और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ाई है. मोर्चा संयोजक मनीष कुंजाम ने कहा कि संभावित रूप से प्रभावित परिवारों की चिंताओं और अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि इस विषय पर दोरला समाज के लोगों से भी चर्चा की गई है. सभा में ग्रामीणों ने जमीन से जुड़े विवादों और अंदरूनी क्षेत्रों की समस्याओं को भी सामने रखा. मोर्चा ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने की बात कही. कुंजाम ने कांग्रेस और भाजपा पर आदिवासी हितों की अनदेखी के आरोप लगाए, हालांकि ये संगठन की राजनीतिक आलोचनाएं हैं. संगठन ने स्थानीय मुद्दों पर ग्रामीणों को एकजुट कर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया. अब निगाह इस बात पर है कि संभावित डूबान और अधिकारों से जुड़े सवालों पर प्रभावित ग्रामीणों को क्या ठोस जानकारी और समाधान मिल पाता है.
जारम घाट में श्रद्धालुओं की बस पलटी, 20 से अधिक यात्री घायल
दंतेवाड़ा. नवरात्र में मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं की यात्रा सोमवार को हादसे में बदल गई. दंतेवाड़ा से तीरथगढ़ जलप्रपात की ओर जा रही एक बस जारम घाट की चढ़ाई पर अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसे में 20 से अधिक यात्री घायल हुए, जिनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल बताए गए हैं. जानकारी के अनुसार, बालोद जिले के तमोरा गांव से करीब 40 श्रद्धालु किराए की बस से मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए पहुंचे थे. मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सभी कटेकल्याण मार्ग से तीरथगढ़ जलप्रपात घूमने जा रहे थे. सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे पोन्दुम के आगे जारम घाट की चढ़ाई पर बस आगे नहीं बढ़ पाई और पीछे की ओर लुढ़कने लगी. चालक ने वाहन को संभालने की कोशिश की, लेकिन बस सड़क किनारे पलट गई. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कुछ यात्री बस के भीतर फंस गए. स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से यात्रियों को बाहर निकालने में सहयोग किया. 108 एंबुलेंस से घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी जांच और उपचार किया गया. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अधिकतर घायलों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि दो मरीजों का इलाज जारी था. पुलिस हादसे के कारणों और बस की तकनीकी स्थिति की जांच कर रही है.

बस्तर दशहरा के रथ निर्माण में सांसद ने किया श्रमदान
जगदलपुर. विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की तैयारियों के बीच पारंपरिक रथ निर्माण को गति देने के साथ कारीगरों का उत्साह बढ़ाने की पहल की गई. सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप सिरहासार पहुंचे और रथ निर्माण में श्रमदान किया. इस दौरान उन्होंने झारउमरगांव से आए पारंपरिक रथ निर्माताओं से मुलाकात कर उनके काम की सराहना की. कारीगरों को वस्त्र वितरित कर उनके योगदान के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया गया. बस्तर दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं और करीब 75 दिनों तक चलने वाले आयोजनों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखता है. इस महापर्व का विशाल पारंपरिक रथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहता है. रथ निर्माण में जुटे कारीगर पीढ़ियों से चली आ रही लकड़ी की कारीगरी और पारंपरिक तकनीकों के जरिए इस विरासत को आगे बढ़ाते हैं. सांसद महेश कश्यप ने स्वयं श्रमदान कर आयोजन में जनभागीदारी और पारंपरिक शिल्प के महत्व को रेखांकित किया. बस्तर दशहरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्थानीय समाजों की सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है. ऐसे में रथ निर्माण से जुड़े कारीगरों की भूमिका इस ऐतिहासिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने में अहम है. आयोजन की तैयारियों के बीच अब रथ निर्माण और विभिन्न पारंपरिक रस्मों को समय पर पूरा करने पर जोर है.
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